25 C
Baijnath
August 17, 2026
Religious

Navratri:नवरात्र की थाली: स्वाद, आस्था और परंपरा का अनोखा संगम, जहां हर निवाले में बस्ती है प्रकृति और संस्कृति की कहानी।

नवरात्र का पर्व न केवल आध्यात्मिक उत्साह का प्रतीक है, बल्कि यह हमारी रसोई और थाली को भी एक नए रंग में रंग देता है। इस दौरान रोजमर्रा के अनाज और मसाले थाली से गायब हो जाते हैं, और उनकी जगह लेते हैं सात्विक व्यंजन, जो न सिर्फ स्वादिष्ट हैं, बल्कि परंपरा, इतिहास और प्रकृति से गहराई से जुड़े हैं। हॉलिडे इन कटड़ा वैष्णो देवी के हेड शेफ विकेश राणा के अनुसार, नवरात्र की थाली में हर व्यंजन एक कहानी कहता है, जो आस्था और संस्कृति का अनोखा मेल प्रस्तुत करता है।

साबुदाना खिचड़ी: महाराष्ट्र से निकली यह डिश आज पूरे भारत में व्रत की थाली का अभिन्न हिस्सा है। साबुदाने के पारदर्शी दाने, आलू और मूंगफली के साथ मिलकर उपवास में ऊर्जा का भंडार बनते हैं। यह व्यंजन हमें बताता है कि सादगी में भी शक्ति छिपी है।

लौकी कोफ्ता करी: अक्सर साधारण समझी जाने वाली लौकी नवरात्र में नायक बनकर उभरती है। प्याज-लहसुन रहित हल्की ग्रेवी में डूबे कोफ्ते स्वाद और स्वास्थ्य का अनूठा संगम हैं। यह सिखाता है कि साधारण सामग्री भी सही संयोजन में असाधारण बन सकती है।

शकरकंद का हलवा: कभी गरीब का भोजन मानी जाने वाली शकरकंद आज घी और गुड़ की मिठास के साथ व्रत की थाली में खास स्थान रखती है। यह हलवा मौसम और संस्कृति का मधुर मेल है, जो हर चम्मच में बचपन की यादें ताजा करता है।

सिंघाड़े के पकौड़े: जलाशयों से जुड़े सिंघाड़े को लोककथाओं में पवित्र माना जाता है। कटड़ा की गलियों में गरमागरम पकौड़े और दही या चाय के साथ यह व्यंजन श्रद्धालुओं की थकान मिटाता है।

कुट्टू की पूरी: पहाड़ी इलाकों में उगने वाला कुट्टू का आटा, जो वास्तव में बीज है, नवरात्र में थाली का ताज बनता है। दही या आलू-टमाटर की सब्जी के साथ परोसी जाने वाली यह पूरी परंपरा का जीवंत अनुभव है।

नवरात्र के ये व्यंजन न केवल स्वाद और आस्था का प्रतीक हैं, बल्कि पोषण विज्ञान में भी ‘सुपरफूड’ की श्रेणी में आते हैं। कुट्टू, राजगीरा, सामा, सिंघाड़ा और शकरकंद जैसे अनाज और फल ग्लूटेन-फ्री हैं, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर हैं, और लंबे समय तक तृप्ति प्रदान करते हैं। ये शरीर को मौसम के बदलाव के अनुकूल ढालने में मदद करते हैं।

शेफ विकेश राणा का मानना है कि परंपरा को जीवित रखते हुए उसमें नवाचार का छौंक लगाना जरूरी है। साबुदाना खिचड़ी को ‘साबुदाना बाइट्स’, शकरकंद हलवे को टार्ट शेल्स में सजाकर, या कुट्टू के आटे से कुरकुरी रोटियां बनाकर नवरात्र की थाली को आधुनिक और वैश्विक स्वरूप दिया जा सकता है। यह बदलाव परंपरा की आत्मा को बनाए रखते हुए नए स्वाद का परिचय देता है।

नवरात्र की थाली केवल भोजन नहीं, बल्कि एक जीवित परंपरा है। हर व्यंजन में दादी-नानी की कहानियां, आस्था की सुगंध और प्रकृति का आलिंगन समाया है। शेफ विकेश कहते हैं, “जब मैं कुट्टू की पूरी बेलता हूं या शकरकंद का हलवा बनाता हूं, तो मुझे लगता है कि मैं सिर्फ खाना नहीं बना रहा, बल्कि एक संस्कृति को जीवित रख रहा हूं।” यह थाली हमें सिखाती है कि हर निवाला न केवल भूख मिटाता है, बल्कि पीढ़ियों को जोड़ने वाली एक कहानी भी कहता है।

नवरात्र का यह पर्व हमें याद दिलाता है कि हमारी थाली में परोसा गया भोजन केवल स्वाद का खेल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और प्रकृति का अनमोल उपहार है। इसे सहेजना और अगली पीढ़ी तक पहुंचाना हमारा दायित्व है।


Related posts

पापमोचनी एकादशी 2025: भगवान विष्णु और तुलसी पूजा का महत्व

Admin

हिमाचल के किन्नौर में युला कांडा स्थित है विश्व का सबसे ऊंचा श्रीकृष्ण मंदिर, जहां जन्माष्टमी पर उमड़ते हैं भक्तों के समूह।

Admin

Shardiya Navratri: शारदीय नवरात्र 2025: मां दुर्गा के नौ रूपों को समर्पित पावन पर्व शुरू, भक्तिमय संदेशों से दें शुभकामनाएं

Admin

Leave a Comment