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August 16, 2026
Kullu

बेसहारा बच्चों की पालनहार बनी सुदर्शना ठाकुर, ममता के आंचल का सहारा दे कर बना रही आत्मनिर्भर

12 मई ब्यूरो रिपोर्ट

कहते हैं कि मां कभी अपने बच्चों में भेदभाव नहीं करती हैं. एक मां की ममता अपने बच्चों के लिए एक समान होती है. एक मां के लिए ममता का ये भाव सिर्फ खुद के बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि सभी बच्चों के लिए होता है. मां के प्यार के आगे दुनिया की हर खुशी छोटी पड़ जाती है. इसी को कुल्लू जिले की सुदर्शना ठाकुर ने सच साबित कर दिया है. जहां एक ओर हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने बेसहारा बच्चों के संरक्षण के लिए सुख आश्रय योजना का गठन किया है. वहीं, जिला कुल्लू की पर्यटन नगरी मनाली में भी एक ऐसी मां है, जो कि न सिर्फ बेसहारा बच्चों का पालन पोषण कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की ट्रेनिंग भी दे रही हैं.

बेसहारा बच्चों का मां का प्यार

पर्यटन नगरी मनाली के साथ लगते खखनाल में राधा एनजीओ की संचालिका सुदर्शना ठाकुर बीते कई सालों से बेसहारा बच्चों का सहारा बन रही हैं और उनका पालन पोषण करके उन्हें समाज की मुख्य धारा में लाने का काम कर रही हैं. सुदर्शना ठाकुर कुल्लू जिले का एक जाना पहचाना नाम है. बेसहारा बच्चों के लिए सुदर्शना ठाकुर उनकी मां हैं, जिनसे उन्हें सहारा और ममता दोनों मिली है.

1977 से बेसहारा बच्चों को दे रही मां का आंचल

बता दें कि सुदर्शना ठाकुर 1997 से बेसहारा बच्चों को मां का आंचल दे रही हैं. मौजूदा समय में उनके पास 15 बच्चे हैं और सभी की उम्र 18 साल से ज्यादा है. इनमें से कई बच्चे लंबे समय से उनके साथ रहते हैं. वहीं, कुछ बच्चों को प्रशासन ने बाल आश्रम भी भेज दिया था, लेकिन वो लौटकर वापस सुदर्शना के पास आ गए, क्योंकि सुर्दशना में उन्हें अपनी मां नजर आती है. मां के प्यार का लालच उन्हें सुर्दशना से दूर जाने ही नहीं देता है.

ऐसे बनी सुदर्शना बेसहारा बच्चों की मां

सुदर्शना बताती हैं कि साल 1997 में उन्होंने सड़कों पर घूम रहे जरूरतमंद बच्चों को देखा था. तब वे बच्चे काफी छोटे थे. इनमें से किसी बच्चे की मां नहीं थी, किसी के पिता नहीं थे तो कई बच्चे पूरी तरह से अनाथ थे. जिसके बाद सुदर्शना ने इन बच्चों को अपने परिवार में शामिल किया और इनका पालन पोषण करने लगी. हालांकि इन बच्चों को पालने में सुदर्शना को काफी सारी मुश्किलें भी आई, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. आज राधा एनजीओ द्वारा दी गई शिक्षा से कई बच्चे अच्छे मुकामों पर पहुंच गए हैं. आज भी सुदर्शना का ये अभियान लगातार जारी है.

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