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October 24, 2026
Dharamshala

Winter Session:हिमाचल में अब सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए लेनी होगी सरकार की मंजूरी, सुक्खू सरकार ने बदला नियम

धर्मशाला. हिमाचल प्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में सुक्खू सरकार ने पुलिस अधिनियम में संशोधन विधेयक पास किया. इस एक्ट में संशोधन के बाद अब प्रदेश में किसी भी सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी के लिए पहले सरकार की अनुमति लेनी होगी. यानी सरकार यदि मंजूरी नहीं देगी तो किसी भी कर्मचारी या अधिकारी को आपराधिक मामलों में गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. हालांकि, सरकार ने कहा है कि इस मसले पर एसओपी बनाई जाएगी.

दरअसल, हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार ने विधानसभा के शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश पुलिस अधिनियम में संशोधन विधेयक पेश किया. इस संशोधन विधेयक के अनुसार, अब सरकार की अनुमति से ही ड्यूटी के दौरान सरकारी कर्मचारियों को गिरफ्तारी होगी. इसके अलावा, कांस्टेबलों का काडर भी अब राज्य स्तर का होगा. यानी अब एक जिले से दूसरे जिले में भी उनकी ट्रांसफर की जा सकती है. साथ ही राज्य में पुलिस की भर्ती राज्य पुलिस बोर्ड करेगा. हालांकि, विपक्ष ने इस संशोदन का विरोध जताया था लेकिन बाद में यह विधेयक पारित हो गया.

इस संशोधन पर सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में कहा कि किसी भी प्रकार के अपराध पर कार्रवाई की रोक नहीं है, यह इसलिए किया गया है कि सरकार को जानकारी होनी चाहिए. इसके लिए SOP जारी किए जाएंगे. सीएम ने सदन में कहा कि ऐसे कई मामले आए हैं, जिनमें सरकार की जानकारी के बिना ही गिरफ्तारियां हुई हैं. सीआरपीसी और बीएनएस और अन्य किसी कानूनी धारा को ना प्रभावित किया गया है, ना ही छेड़ा गया है. जो अपराध करेगा, उस पर तय कानून के मुताबिक ही एक्शन होगा.

विपक्ष को घेरते हुए सीएम ने कहा कि ये लोग काल्पनिक बुद्धिमता का परिचय दे रहे हैं. संशोधन विधेयक में सब कुछ स्पष्ट है. अगर कोई पटवारी रिश्वत लेता है, उस पर उसी समय कार्रवाई की जाएगी. इस संशोधन के जरिए द्वेष भावना से जो एफआईआर दर्ज की जाती है, उस पर रोक लगाने के लिए संशोधन लाया गया है.

उधर, भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि अगर पहले से ही पुलिस के अंदर गिरफ्तारी को लेकर हर तरह के प्रावधान हैं तो आखिर सरकार से अनुमति लेने संबंधी ये संशोधन लाने की क्या जरूरत है. सीएम ने सदन में कहा कि विपक्षी विधायक दोमुंही बात कर रहे हैं. एक तरफ कर्मचारियों के हितों की बात कर रहे हैं और दूसरी तरफ कुछ और बात कर रहे हैं.

भाजपा के सवाल और सीएम के जवाब

भाजपा विधायक त्रिलोक जंबाल ने कहा कि ऐसी क्या जरूरत आन पड़ी कि कानून में संशोधन एक्ट लाना पड़ा. कौन सा ऐसा लोकसेवक है जो ईमानदारी से कार्य कर रहा हो और उसे गिरफ्तार किया गया हो, आज दिन तक जब इसकी जरूरत ही नहीं तो अब पुलिस एक्ट में संशोधन की एकाएक क्या जरूरत पड़ गई. इंटरनल बिजनेस और एक्ट में जमीन आसमान का अंतर है. इस एक्ट के पास होने के तुरंत बाद अन्य कानून इस पर लागू नहीं होंगे. ऐसे में इस संशोधन को वापस लेने की सख्त जरूरत है. जंबाल की इस बातच पर स्पष्टीकरण देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम एक अलग से एसओपी जारी कर देंगे. इसमें कोई दो राय है. ऐसा प्रतीत होता है कि ये कर्मचारी हितैषी नहीं हैं. रणधीर शर्मा ने कहा कि पहले एसओपी लाएं, फिर संशोधन करें. हालांकि, विपक्ष के विरोध करने के बाबजूद भी ध्वनिमत से हिमाचल प्रदेश पुलिस संशोधन विधेयक 2024 पारित हो गया.इस दौरान ध्वनिमत पर विपक्ष ने जोर से आवाज लगा कर अपना विरोध प्रकट किया.

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