हिमाचल प्रदेश के युवाओं ने एक बार फिर देशसेवा के जज्बे को साबित करते हुए राज्य का नाम रोशन किया है। कांगड़ा जिले के 23 वर्षीय रितेश राणा और धर्मशाला के अनिरुद्ध शर्मा भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त कर लेफ्टिनेंट बन गए हैं।
पिता की वर्दी से मिली प्रेरणा
कांगड़ा जिले के अटियाला दाई (टोरू) निवासी 23 वर्षीय रितेश राणा ने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) से अपनी ट्रेनिंग पूरी कर सेना में अधिकारी के रूप में कदम रखा। रितेश एक सैन्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं; उनके पिता विक्रम सिंह सेना की 6 जैक राइफल्स से सूबेदार के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। पिता को वर्दी में देखकर ही रितेश के मन में देशसेवा का सपना जागा था। रितेश को सेना की 16 मद्रास रेजिमेंट में तैनाती मिली है।
उच्च शिक्षा के साथ की सैन्य तैयारी
रितेश ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा मरूंह और ठाकुरद्वारा के स्थानीय स्कूलों से पूरी की। इसके बाद उन्होंने पुणे से बी.एससी (B.Sc.) और एम.एससी (M.Sc.) की डिग्री हासिल की। उच्च शिक्षा की पढ़ाई के दौरान भी उनका मुख्य लक्ष्य भारतीय सेना में अधिकारी बनना ही रहा। उन्होंने कठिन अनुशासन, धैर्य और लगातार मेहनत के बल पर ओटीए चेन्नई में प्रवेश पाया और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण को सफलता पूर्वक पूरा किया। रितेश ने अपनी इस उपलब्धि का श्रेय अपने माता-पिता, बहन, दादा-दादी और गुरुजनों को दिया है।
धर्मशाला के अनिरुद्ध शर्मा भी बने सैन्य अधिकारी
दूसरी ओर, धर्मशाला के रामनगर निवासी अनिरुद्ध शर्मा ने भी बिहार के गया स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA Gaya) से कठिन प्रशिक्षण पूरा कर भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट का पद हासिल किया है। अनिरुद्ध के पिता निशांत शर्मा एक व्यवसायी हैं और माता सपना शर्मा गृहिणी हैं।
दोनों युवाओं की इस शानदार सफलता से उनके गृह क्षेत्रों में खुशी की लहर है और वे क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत बन गए हैं।
