चीनी की बढ़ती कीमतों से परेशान आम उपभोक्ताओं के लिए राहत की खबर है। मिलों में चीनी के दाम रिकॉर्ड स्तर से करीब 30 फीसदी तक गिरकर अब लगभग 47 रुपये प्रति किलोग्राम रह गए हैं। हालांकि, खुदरा बाजार में इसका फायदा अभी उपभोक्ताओं तक पूरी तरह नहीं पहुंचा है। करीब एक महीने पहले 45 से 50 रुपये किलो बिकने वाली चीनी की कीमत बढ़कर कई जगहों पर 65 रुपये प्रति किलोग्राम से भी ऊपर पहुंच गई थी। अब मिल रेट में गिरावट के बावजूद गली-मोहल्ले की दुकानों और ऑनलाइन बाजार में चीनी पुराने और महंगे भाव पर ही बिक रही है।
बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मिल स्तर पर कीमतों में कमी आने के बाद थोक बाजार में इसका असर जल्दी दिखाई देता है, लेकिन खुदरा बाजार तक इसका असर पहुंचने में कुछ समय लगता है। इसकी बड़ी वजह दुकानदारों के पास मौजूद पुराना स्टॉक है। खुदरा विक्रेताओं ने जिस कीमत पर चीनी खरीदी है, उसे बेचने के बाद ही वे नई कम कीमत पर खरीदारी कर पाएंगे। ऐसे में पुराने स्टॉक के रहते कीमतों में तत्काल कटौती की संभावना कम रहती है। एक बड़ी परचून की दुकान पर औसतन 10 से 15 बोरी तक चीनी का स्टॉक मौजूद हो सकता है, जिसके खत्म होने के बाद ही नई कीमतों का असर ग्राहकों तक पहुंचने की उम्मीद है।
चीनी उद्योग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, एक्स-मिल और थोक कीमतों के बीच आमतौर पर 2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर रहता है, जबकि मिल और खुदरा कीमतों के बीच करीब 7 से 8 रुपये प्रति किलोग्राम का अंतर सामान्य माना जाता है। ऐसे में मिल रेट में आई मौजूदा गिरावट का असर खुदरा बाजार में दिखाई देने में कम से कम 10 दिन का समय लग सकता है। जैसे-जैसे दुकानदारों का पुराना महंगा स्टॉक खत्म होगा और वे कम कीमत पर नई चीनी खरीदेंगे, वैसे-वैसे खुदरा कीमतों में भी गिरावट आने की उम्मीद है।
चीनी की कीमतों पर नियंत्रण रखने और घरेलू बाजार में आपूर्ति बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने भी कई कदम उठाए हैं। सरकार ने मिलों को निर्यात के लिए रिफाइंड की गई चीनी को घरेलू बाजार में बेचने की अनुमति दी है। अनुमान है कि अगले दो महीनों में करीब 3 से 3.5 लाख टन रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में उपलब्ध हो सकती है। इससे बाजार में आपूर्ति बढ़ने और कीमतों पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
इसके अलावा, बड़े पैमाने पर चीनी का इस्तेमाल करने वाले थोक उपभोक्ताओं के स्टॉक पर भी निगरानी बढ़ाई गई है। जिन उपभोक्ताओं के पास 15 दिनों से अधिक का स्टॉक था, उन्होंने सरकार के नए नियमों के अनुरूप अपना भंडार कम किया है। सरकार का कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है। ऐसे में आने वाले दिनों में आपूर्ति बेहतर होने और पुराना महंगा स्टॉक खत्म होने के साथ खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमतों में राहत मिलने की उम्मीद है।
