बैजनाथ, 24 अगस्त 2026 (वीर खड़का)
अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति विकास निधि कानून बनाने की मांग को लेकर राज्य गठबंधन हिमाचल प्रदेश की बैजनाथ विधानसभा इकाई ने सोमवार को प्रदर्शन किया। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने उपमंडलीय दंडाधिकारी (SDM) बैजनाथ के माध्यम से मुख्यमंत्री हिमाचल प्रदेश को ज्ञापन सौंपकर एससी/एसटी विकास निधि के लिए अलग कानून बनाने की मांग उठाई।
ज्ञापन में मांग की गई कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या के अनुपात में बजट का प्रावधान किया जाए और इस राशि के प्रभावी, पारदर्शी एवं जवाबदेह उपयोग को सुनिश्चित करने के लिए कानून बनाया जाए। गठबंधन ने आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और राजस्थान की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी एससी/एसटी विकास निधि कानून लागू करने की मांग की।
प्रतिनिधियों के अनुसार राज्य के कुल योजना बजट में एससी वर्ग के लिए लगभग 33 प्रतिशत और एसटी वर्ग के लिए लगभग 8 प्रतिशत आबादी के अनुपात में बजट आवंटन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आवंटित धनराशि का उपयोग केवल अनुसूचित जाति एवं जनजाति के सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक विकास के लिए होना चाहिए। साथ ही भूमिहीन परिवारों को आवासीय एवं कृषि योग्य भूमि उपलब्ध करवाने की मांग भी उठाई गई।
राज्य गठबंधन के प्रतिनिधि एवं कबीर पंथ समाज सुधार सभा हिमाचल प्रदेश के प्रदेश अध्यक्ष मस्तराम ने कहा कि वर्ष 1980 में अनुसूचित जाति घटक योजना और जनजाति उप योजना शुरू होने के बावजूद हिमाचल प्रदेश में इन प्रावधानों को अपेक्षित रूप से लागू नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि पिछले पांच वर्षों में एससी/एसटी विकास के लिए बजटीय आवंटन करीब 5 प्रतिशत तक सीमित रहा है, जबकि जनसंख्या के अनुपात में यह काफी अधिक होना चाहिए।
गठबंधन के प्रतिनिधि मिलाप चंद, प्रधान संत गुरु रविदास महासभा बैजनाथ इकाई, ने बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों के दौरान गठबंधन ने मुख्यमंत्री, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, विभिन्न राजनीतिक दलों के विधायकों, राष्ट्रीय नेताओं, राज्य वित्त आयोग तथा विधानसभा कल्याण समिति के प्रतिनिधियों के साथ इस मुद्दे पर बैठकें और वार्ताएं की हैं। उन्होंने कहा कि 11 फरवरी 2024 को मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रस्तावित कानून का मसौदा भी सौंपा गया था।
गठबंधन ने सरकार से आगामी विधानसभा मानसून सत्र में इस कानून को बनाने की प्रक्रिया शुरू करने की अपील की। प्रतिनिधियों ने कहा कि कानून बनने से हिमाचल प्रदेश में सामाजिक न्याय और समावेशी विकास को मजबूती मिलेगी।
प्रदर्शन में भूमिहीन भूमि अधिकार मंच के संयोजक संजय कुमार, बेटियां फाउंडेशन के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त एसडीओ बीएसएनएल राजकुमार, संजीव कुमार सकड़ी, राजकुमार डोली खुर्द, मीना अरनोत, सूबेदार प्रताप चंद बही, राकेश कुमार उर्फ डबला सहित करीब 70 लोग शामिल हुए। उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि मांग पूरी होने तक शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रखा जाएगा।
