September 23, 2026
Shimla

Himachal News :कराहते पहाड़- अवैज्ञानिक खनन, अनियोजित सड़कें और अवैध डंपिंग ने सराज में मचाई तबाही

30 जून 2025 को मंडी के सराज क्षेत्र में आई प्राकृतिक आपदा ने भारी तबाही मचाई, जिसमें सात लोगों की जान चली गई और 21 लोग अभी भी लापता हैं। इस आपदा ने सैकड़ों घरों, दुकानों, स्कूलों और सड़कों को मलबे के ढेर में बदल दिया। थुनाग, बगस्याड़, जरोल, कुथाह, बूंगरैलचौक और पांडवशीला जैसे इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जहां 266 किलोमीटर सड़कें दो महीने बाद भी बंद हैं। आलू, गोभी, मटर और सेब जैसे उत्पाद खेतों में सड़ रहे हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

मानवीय लापरवाही ने बढ़ाया आपदा का कहर
विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण हिमाचल में तापमान 0.9 डिग्री सेल्सियस बढ़ा, जिसने मानसून की तीव्रता को बढ़ाया। लेकिन अवैज्ञानिक खनन, बिना योजना के सड़क निर्माण और अवैध डंपिंग ने पारिस्थितिक संतुलन को और बिगाड़ दिया। सराज घाटी में वन संरक्षण अधिनियम (एफसीए) 1980 की अनदेखी कर 181 लंबी 55 सड़कें बनाई गईं, जिनके लिए हजारों पेड़ काटे गए और मलबा नदियों-नालों में डंप किया गया। इससे प्राकृतिक जल स्रोत अवरुद्ध हुए, भूमिगत दबाव बढ़ा और फ्लैश फ्लड का खतरा बढ़ गया।

अनियोजित निर्माण और अवैध डंपिंग बने संकट की जड़
स्थानीय इनोवेटर ओम प्रकाश ठाकुर ने बताया कि सड़क निर्माण और अवैध डंपिंग से प्राकृतिक जल स्रोत बंद हो गए, जिससे पानी का बहाव रुकने और भूस्खलन की घटनाएं बढ़ीं। कशमल की खोदाई से बागाचनोगी उपतहसील की सात पंचायतों में भूस्खलन का खतरा बढ़ा। चिऊणी की मटर वैली में खरपतवार नाशक स्प्रे से मिट्टी कमजोर हुई, जिसने भूस्खलन को बढ़ावा दिया। बगस्याड़ के दिवांशु ठाकुर ने 20-22 करोड़ के ग्रीनहाउस फूल उद्योग से गैस उत्सर्जन को जलवायु परिवर्तन का एक कारण बताया। सड़कों पर जल निकासी नालियों का अभाव भी आपदा को और घातक बना रहा।

नदी किनारों पर बस्तियां बढ़ा रहीं खतरा
केंद्रीय विश्वविद्यालय जम्मू-कश्मीर के पर्यावरण विज्ञान विभाग के प्रोफेसर सुनील धर ने बताया कि अनियोजित सड़कें और अपर्याप्त रिटेनिंग वॉल ने पहाड़ों की स्थिरता कमजोर की। खड्डों और नदी किनारों पर बनी असुरक्षित बस्तियों ने खतरे को और बढ़ाया। हिमालय नीति अभियान के संयोजक गुमान सिंह ने चेतावनी दी कि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को नजरअंदाज करने से ऐसी त्रासदियां और बढ़ेंगी।

भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट में 72 गांव
मंडी जिले के 72 गांव भूस्खलन और भू-धंसाव की चपेट में हैं। बालचौकी, धर्मपुर, जोगिंद्रनगर, थुनाग सहित कई उपमंडलों में घरों में दरारें और पहाड़ों के दरकने की घटनाएं बढ़ रही हैं। पराशर और कुडनी गांव भी इससे अछूते नहीं हैं। इन क्षेत्रों में भूवैज्ञानिक जांच के लिए गांवों को चिह्नित किया गया है ताकि आपदाओं के कारणों का सटीक आकलन हो सके।

वैज्ञानिक निर्माण और वनीकरण की जरूरत
डीएफओ नाचन सुरेंद्र कश्यप ने प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण, वैज्ञानिक तरीके से निर्माण और वनीकरण पर जोर दिया। आपदा प्रभावित जंगलों में नई प्लांटेशन की योजना बनाई जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है, वरना ऐसी आपदाएं भविष्य में और घातक हो सकती हैं।

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