May 15, 2026
Lahaul and Spiti

Lahoul And Spiti: मनाली-लेह मार्ग बहाली में बीआरओ की रफ्तार तेज, रक्षा मंत्रालय का निर्देश

केलांग : भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते तनाव और पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद रक्षा मंत्रालय ने सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) को मनाली-लेह सड़क को जल्द से जल्द बहाल करने के निर्देश दिए हैं। लद्दाख की सरहद तक पहुंचने के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले इस मार्ग को खोलने के लिए बीआरओ पर केंद्र सरकार का दबाव बढ़ गया है।

बीआरओ ने 16,300 फीट की ऊंचाई पर स्थित बारालाचा दर्रा में पूजा-अर्चना के बाद बर्फ हटाने का अभियान तेज कर दिया है। मंगलवार को बारालाचा दर्रा फतह करने के बाद बीआरओ का काफिला अब सरचू की ओर बढ़ रहा है, जो हिमाचल और लद्दाख की सरहद से महज 30 किलोमीटर दूर है। बीआरओ के एक अधिकारी ने बताया कि मौसम अनुकूल रहा तो दो सप्ताह के भीतर सरचू तक सड़क वाहनों के लिए खुल जाएगी।

कठिन परिस्थितियों में बीआरओ का मिशन
मनाली-लेह मार्ग को बहाल करने के लिए बीआरओ की 70 आरसीसी इकाई ने डेढ़ दर्जन मशीनों को तैनात किया है। यह इलाका समुद्र तल से 14,000 से 16,000 फीट की ऊंचाई पर है, जहां दिन में भी तापमान शून्य से नीचे रहता है। कड़ाके की ठंड और ऑक्सीजन की कमी के बावजूद बीआरओ के जवान और अधिकारी दिन-रात बर्फ हटाने के मिशन में जुटे हैं। खराब मौसम के बीच भी बीआरओ ने दारचा से बारालाचा दर्रा तक सड़क बहाल कर ली है।

पहलगाम हमले ने बढ़ाया दबाव
पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद मनाली-लेह मार्ग की रणनीतिक अहमियत और बढ़ गई है। यह मार्ग लद्दाख की सीमा तक पहुंचने का सबसे सुरक्षित रास्ता है। बीआरओ ने बारालाचा के साथ-साथ सरचू की ओर से भी बर्फ हटाने के लिए मशीनें तैनात की हैं। पिछले साल यह मार्ग 23 अप्रैल को ट्रैफिक के लिए खुला था, लेकिन इस बार बीआरओ इसे और जल्द खोलने की कोशिश में है।

हिमांक प्रोजेक्ट का योगदान
सरचू से आगे लद्दाख की सरहद तक सड़क बहाली के लिए बीआरओ का हिमांक प्रोजेक्ट सक्रिय है। बीआरओ के इस अभियान से न केवल सैन्य आवाजाही सुगम होगी, बल्कि स्थानीय लोगों और पर्यटकों को भी राहत मिलेगी। बीआरओ के एक अधिकारी ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद सड़क को जल्द से जल्द खोल दिया जाए।”

रक्षा मंत्रालय और बीआरओ की इस तेजी से उम्मीद है कि मनाली-लेह मार्ग जल्द ही वाहनों की आवाजाही के लिए तैयार हो जाएगा, जिससे सामरिक और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण लद्दाख क्षेत्र तक पहुंच आसान होगी।

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