September 4, 2026
Mandi

आज तक कोई नहीं बना सका छत, हिमाचल का वो मंदिर जहां मां दुर्गा खुद आसमान को छत्र मानती हैं

शिकारी देवी मंदिर: रहस्यों से भरा वो अनोखा स्थान जहां छत नहीं टिकती और बर्फ नहीं जमती

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले में, जंजैहली (Janjehli) से लगभग 16-18 किलोमीटर दूर शिकारी पीक पर स्थित है शिकारी देवी मंदिर। यह मंदिर मां दुर्गा के शिकारी रूप को समर्पित है और अपनी अनोखी विशेषताओं के कारण देशभर में प्रसिद्ध है। समुद्र तल से करीब 11,000 फीट (लगभग 3350 मीटर) की ऊंचाई पर बसा यह मंदिर खुले आसमान के नीचे स्थित है—इसकी कोई छत नहीं है, और आज तक कोई भी छत बनाने में सफल नहीं हो सका।

मंदिर का इतिहास और कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि पांडवों ने अपने वनवास (अज्ञातवास) के दौरान हिमालय की इस घाटी में पहुंचकर यहां मां दुर्गा की आराधना की थी। उन्होंने देवी की कृपा से युद्ध में विजय प्राप्त करने की कामना की और मंदिर की स्थापना की।

एक अन्य कथा के अनुसार, ऋषि मार्कंडेय ने यहां वर्षों तक कठोर तपस्या की। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां दुर्गा शिकारी रूप में प्रकट हुईं और ऋषि के अनुरोध पर इस स्थान पर मंदिर बसाया गया।

स्थानीय शिकारियों द्वारा शिकार से पहले यहां पूजा करने की परंपरा के कारण देवी को शिकारी देवी कहा जाने लगा। शिकारी देवी जंगली जानवरों से रक्षा करती हैं और शिकार में सफलता प्रदान करती हैं।

छत न बन पाने का रहस्य

मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसकी छत आज तक नहीं बन पाई। कई बार स्थानीय लोग, राजनेता (जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह भी शामिल हैं) और श्रद्धालुओं ने छत बनाने की कोशिश की, लेकिन हर बार तेज आंधी-तूफान आकर निर्माण को नष्ट कर देता है।

मान्यता है कि मां शिकारी देवी खुद खुले आसमान को अपना छत्र (छाता) मानती हैं और ईंट-पत्थर की छत नहीं चाहतीं। यह देवी की इच्छा है, इसलिए कोई भी प्रयास असफल हो जाता है। यह चमत्कार आज भी लोगों को आश्चर्यचकित करता है।

बर्फ का चमत्कार

एक और अद्भुत बात—जब पूरे इलाके में कई फीट बर्फ गिरती है और चारों ओर सफेद चादर बिछ जाती है, तब भी मंदिर का परिसर (खासकर गर्भगृह) बर्फ से मुक्त रहता है। बर्फ आसपास जमती है, लेकिन मंदिर पर नहीं टिकती।

यह भी देवी का चमत्कार माना जाता है। सर्दियों में मंदिर 3-4 महीने बंद रहता है, लेकिन बर्फ न जमने से यह रहस्य और गहरा हो जाता है।

महत्व और वर्तमान स्थिति

नवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग मानते हैं कि सच्ची श्रद्धा से आने वाले भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं और दुख दूर होते हैं। देवी की मूर्ति पिंडी रूप में है, और पूजा खुले आसमान के नीचे होती है।

यह मंदिर न केवल आस्था का केंद्र है, बल्कि प्रकृति और चमत्कारों का जीता-जागता उदाहरण भी। क्या यह वाकई देवी की इच्छा है या कोई प्राकृतिक/वैज्ञानिक वजह? यह सवाल आज भी अनुत्तरित है, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह मां की कृपा का प्रतीक है।
यदि आप हिमाचल घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो इस रहस्यमयी मंदिर को जरूर शामिल करें—यहां पहुंचकर खुले आसमान तले मां के दर्शन का अनुभव ही अलग है।

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