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Bilaspur:पहले पति को छोड़ा, दूसरे की पत्नी बनी, उसकी मौत के बाद लौटी और बोली – “मुझे 20 हजार महीना दो”… कोर्ट ने कहा “नो!”

बिलासपुर (हिमाचल प्रदेश), 21 नवंबर 2025
फैमिली कोर्ट बिलासपुर ने एक अहम और सख्त फैसले में गुजारा भत्ता की मांग करने वाली महिला की अर्जी खारिज कर दी। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि जो महिला व्यभिचार में रहकर दूसरे पुरुष की पत्नी बनकर रही हो, उसे पहले पति से भरण-पोषण का कोई अधिकार नहीं है, चाहे पहला पति कितना भी अमीर क्यों न हो।

मामला करीब 28 साल पुराना है। महिला ने अपने पहले पति को वर्ष 1997 के आसपास छोड़ दिया था और पंजाब के कपूरथला जिले के गांव संगोजला में साधु जरनैल सिंह के साथ रहने लगी थी। वहां उसने अपना नाम बदलकर ‘लक्ष्मी’ रख लिया और जरनैल सिंह की पत्नी के तौर पर रहने लगी। जरनैल सिंह की मौत के बाद उसने उनकी सारी संपत्ति भी हड़प ली।

2016 में जरनैल सिंह के निधन के बाद महिला को वहां धमकियां मिलने लगीं। उसने अपनी बेटी के माध्यम से पहले पति को फोन करवाया। पंचायत और रिश्तेदारों के साथ पति पंजाब गया और उसे वापस हिमाचल ले आया। वापसी के बाद पति ने उसे घर में अलग से दो कमरे, बाथरूम-टॉयलेट की सुविधा दी, लेकिन वैवाहिक संबंध बहाल नहीं किए।

हाल ही में महिला ने प्रिंसिपल जज फैमिली कोर्ट बिलासपुर में अर्जी देकर दावा किया कि वह अभी भी पहले पति की कानूनी पत्नी है और उसे पिछले एक साल से गुजारा भत्ता नहीं मिला। उसने मासिक 20 हजार रुपये भरण-पोषण की मांग की। महिला ने बताया कि पति के पास 70 बीघा जमीन है, कीरतपुर-नेरचौक फोरलेन के लिए 1.50 करोड़ रुपये मिल चुके हैं और भानुपल्ली-बिलासपुर रेल लाइन के लिए 8-9 बीघा जमीन जाने से उसे करीब 4 करोड़ रुपये और मिलने वाले हैं। इसलिए 20 हजार रुपये महीना देना उसके लिए आसान है।

पति की ओर से कोर्ट में ठोस सबूत पेश किए गए:

  • पंजाब सरकार का राशन कार्ड जिसमें महिला ‘लक्ष्मी पत्नी जरनैल सिंह’ के नाम दर्ज है
  • विधवा पेंशन फॉर्म भी लक्ष्मी पत्नी जरनैल सिंह के नाम से भरा गया
  • आधार कार्ड, वोटर आईडी, पंचायत रिकॉर्ड में जरनैल सिंह की पत्नी के रूप में नाम
  • गांव संगोजला की ग्राम पंचायत का प्रमाण पत्र कि वह जरनैल सिंह की पत्नी के तौर पर रहती थी

महिला अपने दावे के समर्थन में कोई स्वतंत्र गवाह तक नहीं ला सकी, सिर्फ अपना बयान दिया। वहीं पति ने पंचायत प्रधान और अपने बेटे को गवाह बनाया।

कोर्ट ने 17 नवंबर 2025 को दिए फैसले में कहा:

  • धारा 125(4) CrPC के तहत व्यभिचार में रहने वाली पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार नहीं है
  • पति चाहे कितना भी धनी हो, व्यभिचार करने वाली पत्नी को गुजारा भत्ता नहीं दिया जा सकता
  • यह तथ्य कि पति ने भी दूसरी शादी कर ली थी, महिला को व्यभिचार या दूसरी शादी करने का लाइसेंस नहीं देता

अदालत ने महिला की भरण-पोषण अर्जी पूरी तरह खारिज कर दी।

यह फैसला गुजारा भत्ता के मामलों में व्यभिचार के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने का एक महत्वपूर्ण उदाहरण माना जा रहा है।

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