शिमला, 21 नवंबर 2025 – हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के संजौली इलाके में अवैध मस्जिद को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा। हिंदू संघर्ष समिति और देवभूमि संघर्ष समिति के नेतृत्व में हिंदू संगठनों ने शुक्रवार को जुमे की नमाज के खिलाफ सुबह 11 बजे धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। संजौली थाने के बाहर तंबू गाड़कर शुरू किया गया आमरण अनशन आज चौथा दिन में प्रवेश कर चुका है। संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
विवाद की पृष्ठभूमि: अवैध निर्माण पर अदालत का सख्त फैसला
संजौली मस्जिद का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। शिमला नगर निगम ने 3 मई 2025 को पूरी मस्जिद को अवैध घोषित करते हुए इसका पूरा ढांचा तोड़ने का आदेश जारी किया था। निगम के अनुसार, यह पांच मंजिला इमारत सरकारी जमीन पर बिना अनुमति के बनाई गई है। वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी ने इस आदेश को जिला अदालत में चुनौती दी, लेकिन 1 नवंबर 2025 को जिला न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने याचिका खारिज कर दी। अदालत ने वक्फ बोर्ड और मस्जिद कमेटी को दो महीने के अंदर अवैध हिस्से को खुद ढहाने का निर्देश दिया, वरना नगर निगम कार्रवाई करेगा। राजस्व रिकॉर्ड में जमीन राज्य सरकार के नाम दर्ज है, जो नगर निगम अधिनियम के तहत निर्माण के लिए अनिवार्य है।
मस्जिद कमेटी के अध्यक्ष मोहम्मद लतीफ ने कहा कि वे हाईकोर्ट में अपील करेंगे और जरूरत पड़ी तो सुप्रीम कोर्ट तक जाएंगे। हालांकि, अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे स्थानीय हिंदू संगठन नाराज हैं। 2024 में भी इसी मस्जिद को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए थे, जिसमें पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प हुई थी।
नमाज रोकने पर FIR, अनशन की शुरुआत
विवाद तब भड़का जब 14 नवंबर को हिंदू संगठनों के सदस्यों ने मस्जिद में जुमे की नमाज पढ़ने जा रहे मुस्लिम समुदाय के लोगों को रोका। संगठनों का दावा है कि अवैध ढांचे में नमाज नहीं होनी चाहिए। इस घटना में दो महिलाओं समेत छह लोगों पर पुलिस ने FIR दर्ज की। विरोध में हिंदू संघर्ष समिति ने संजौली थाने के बाहर अनशन शुरू कर दिया। अनशन पर बैठे सहसंयोजक विजय शर्मा ने कहा, “हमारी मांग सिर्फ इतनी है कि अवैध मस्जिद का बिजली-पानी काटा जाए और नमाज बंद हो। बैरिकेड्स से हमें डराया नहीं जा सकता।”
गुरुवार देर रात प्रशासन के अधिकारियों और हिंदू नेताओं के बीच बातचीत हुई। हिंदू नेता मदन ठाकुर ने बताया कि FIR वापस करने और बिजली-पानी काटने पर सहमति बनी है, लेकिन संगठन लिखित आदेश का इंतजार कर रहे हैं। नेता कमल गौतम ने फेसबुक पर लिखा, “किसी भ्रामक प्रचार में न फंसें, आंदोलन जारी है। जब तक मांगे न मानी जाएं, पीछे नहीं हटेंगे।” कुछ प्रदर्शनकारियों का दावा है कि मांगें मान ली गई हैं, लेकिन आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई।
शुक्रवार को तनाव बढ़ने की आशंका, पुलिस अलर्ट पर
प्रदर्शन के ऐलान के बाद शिमला पुलिस ने संजौली और आसपास के इलाकों में अतिरिक्त फोर्स तैनात कर दी है। गुरुवार रात को मस्जिद के आसपास बैरिकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन शुक्रवार सुबह कोई भारी पुलिसबल नजर नहीं आया। चर्चा है कि सरकार ने प्रदर्शनकारियों को मना लिया है, लेकिन आधिकारिक बयान का इंतजार है। हिंदू संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर नमाज हुई तो बड़ा आंदोलन होगा।
सोशल मीडिया पर भी बहस तेज है। हिंदू कार्यकर्ताओं ने महिलाओं द्वारा नमाजियों को रोकने का वीडियो शेयर किया, जिसमें वे आईडी कार्ड मांगते दिखे। दूसरी ओर, मुस्लिम पक्ष का कहना है कि यह धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।
संगठनों की मुख्य मांगें
• 14 नवंबर की FIR रद्द हो।
• मस्जिद का बिजली-पानी कनेक्शन तुरंत काटा जाए और ढांचा सील हो।
• अवैध निर्माण को जल्द ढहाया जाए।
• नमाज पर पूर्ण प्रतिबंध लगे।
प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने का भरोसा दिलाया है, लेकिन तनाव बरकरार है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि यह विवाद शांति भंग कर रहा है। हिमाचल सरकार पर राजनीतिक दबाव भी बढ़ रहा है, क्योंकि विपक्ष भाजपा ने इसे कमजोर प्रशासन का मामला बता दिया है।
