30 सितंबर 2024 ( बैजनाथ )
कांगड़ा के अत्यंत दुर्गम क्षेत्र बड़ा भंगाल और विकट मौसमीय परिस्थितियों में जीवन यापन करने वाले छोटा भंगाल के लोगों को जल्द ही 4जी नेटवर्क सुविधा मिलेगी। छोटा भंगाल घाटी में बीएसएनएल द्वारा टावर लगा दिया गया है जो 2 अक्टूबर से कार्य करना आरंभ कर देगा जबकि बड़ा भंगाल में जमीन का चयन कर लिया गया है और टावर लगाने के लिए टेंडर प्रक्रिया भी मुकम्मल हो चुकी है। इन टावरों की विशेषता यह है कि ये सोलर आधारित विद्युत आपूर्ति से क्रियान्वित होंगे और सीधे सेटेलाइट के माध्यम से जुड़ेंगे। वर्तमान में जिला कांगड़ा के बड़ा भंगाल के क्षेत्र के लोग सेटेलाइट फोन के माध्यम से ही शेष देश और दुनिया से जुड़े हैं। जिला प्रशासन द्वारा मुहैया कराए गए इस सेटेलाइट फोन से 1 मिनट बात करने के लिए ₹25 चुकाने पड़ते हैं। यहां 4G नेटवर्क सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए बीएसएनएल द्वारा भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है। यहां बीएसएनल का 20 मीटर ऊंचाई वाला जीबीटी (ग्राउंड बेस्ड टावर) लगाया जाएगा। वर्तमान में हालात यह है कि जब तक बड़ा बंगाल के लोगों तक की खबर पहुंचती है कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका में भारतीय मूल के लोगों को संबोधित कर रहे हैं तब तक देश कई घटनाक्रमों से गुजर चुका होता है। टावर लगाए जाने के बाद यहां के लोग मुकम्मल तौर पर संचार माध्यम से देश और दुनिया से जुड़ जाएंगे। टेलीकॉम सेवाओं की बत्तर हालत से छोटा भंगाल घाटी के लोगों को 2 अक्टूबर से निजात मिलेगी जब चायना पास नामक जगह पर बीएसएनएल द्वारा लगाया गया 40 मीटर ऊंचा जीबीटी कार्य आरंभ कर देगा। इस टावर के माध्यम से छोटा भंगाल का तमाम इलाका,पलाचक,आहजू, जोगिंदर नगर, ग्वाल टिकर सहित तकरीबन 10 किलोमीटर के परिधि क्षेत्र में मुकम्मल तौर पर 4G नेटवर्क उपलब्ध करवाएगा। बॉक्स लगाए: बीएसएनएल के एसडीओ बैजनाथ अनिल कुमार ने कहा कि चायना पास में विभाग द्वारा टावर लगा दिया गया है। प्रयास है 2 अक्टूबर तक शुरू किया जाए। टावर के संचालन के लिए सोलर आधारित तकनीक का इस्तेमाल किया गया है और सेटेलाइट माध्यम से कार्य करेगा। टावर की विशेषता यह भी है कि विपरीत मौसमीय परिस्थितियों के बावजूद बेहतर और निर्बाध संचार सेवा उपभोक्ताओं को उपलब्ध करवाएगा। बड़ा भंगाल में भूमि का अधिग्रहण कर लिया गया है। जल्द यहां के लोगों को भी 4जी नेटवर्क सुविधा उपलब्ध होगी। बॉक्स लगाए: बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने कहा कि क्योंकि इस घाटी में विश्व स्तरीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। कई दफा पायलट इन पहाड़ियों में आपात लैंडिंग करते हैं या फिर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं उन परिस्थितियों में भी यह टावर मील का पत्थर साबित होंगे। निचले क्षेत्रों के तमाम भेड़पालक इन घाटियों में गर्मियों और बरसात में पलायन करते हैं लिहाजा वर्तमान समय तक संचार सुविधा मिल पाने से वे केई महीनों तक अपने परिजनों से बात नहीं कर पाते थे। टावर लगने से वे अपने घर और परिवार से लगातार जुड़े रहेंगे
बिलिंग पैराग्लाइडिंग एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग शर्मा ने कहा कि क्योंकि इस घाटी में विश्व स्तरीय पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिताएं आयोजित होती हैं। कई दफा पायलट इन पहाड़ियों में आपात लैंडिंग करते हैं या फिर दुर्घटनाओं का शिकार हो जाते हैं उन परिस्थितियों में भी यह टावर मील का पत्थर साबित होंगे। निचले क्षेत्रों के तमाम भेड़पालक इन घाटियों में गर्मियों और बरसात में पलायन करते हैं लिहाजा वर्तमान समय तक संचार सुविधा मिल पाने से वे केई महीनों तक अपने परिजनों से बात नहीं कर पाते थे। टावर लगने से वे अपने घर और परिवार से लगातार जुड़े रहेंगे।
