April 15, 2026
Shimla

हिमाचल के जंगलों में होटल का मजा, सुक्खू सरकार की नई ईको पर्यटन नीति से मिलेगा कितना फायदा?

शिमला। देश-विदेश से हिमाचल घूमने आने वाले पर्यटक अब शहर की भीड़ से दूर प्रकृति के नजदीक सुकून के पल बिता सकेंगे। राज्य सरकार पर्यटकों की सुविधा के लिए नई ईको पर्यटन नीति (ईको टूरिज्म पॉलिसी) लेकर आई है। इसमें प्रदेश में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई तरह की छूट दी गई हैं। नई नीति में सरकार ने कई प्रविधान किए हैं।

पर्यटकों को जंगलों में होटल जैसी सुविधाएं मिलेंगी यानी जो साइट बनेगी उसमें पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना हट्स व अन्य कमरे इत्यादि (ईको फ्रेंडली स्ट्रक्चर) तैयार किए जाएंगे। पर्यटन विभाग एक हेक्टेयर वन भूमि पर यदि ईको पर्यटन साइट विकसित करना चाहता है तो उसके लिए कैबिनेट की मंजूरी नहीं लेनी पड़ेगी।

विभागीय स्तर पर ही इसकी औपचारिकताओं को पूरा कर मंजूरी मिल सकेगी। प्रस्ताव की केवल फाइल ही मंत्री को भेजी जाएगी। इससे व्यवसायियों को लाभ मिलेगा और उन्हें स्वीकृति के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। एक हेक्टेयर से अधिक भूमि पर ईको पर्यटन साइट बन रही है तो मामला कैबिनेट को भेजा जाएगा। सरकार ने बीते सप्ताह ही नई पर्यटन नीति को अधिसूचित किया है।

पर्यटन साइट बन रही है तो मामला कैबिनेट को भेजा जाएगा। सरकार ने बीते सप्ताह ही नई पर्यटन नीति को अधिसूचित किया है।

स्थानीय युवाओं को मिलेगा रोजगार

नई पर्यटन नीति को बनाने का मकसद प्रदेश में नए पर्यटनस्थल विकसित करना और स्थानीय युवाओं को रोजगार मुहैया करवाना है। ईको टूरिज्म साइट को 10 वर्ष के लिए किसी फर्म या व्यक्ति को देगी। इसकी लीज को पांच साल तक बढ़ाया जा सकता है। जंगलों में पक्के स्ट्रक्चर नहीं बनाए जा सकेंगे। स्थानीय लोगों को इन साइट पर अनिवार्य रूप से रोजगार देना होगा।
नई इको पर्यटन नीति के फायदे
हिमाचल प्रदेश में पर्यटन को इससे बढ़ावा मिलेगा।

स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार का विकल्प बढ़ेगा।

स्थानीय स्तर पर उत्पादित सामान और सेवाओं का इस्तेमाल होगा, इससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को लाभ मिलेगा।
ईको टूरिज्म से होने वाली कमाई का 20% पर्यावरण संरक्षण पर खर्च किया जाएगा।

पर्यावरण को नहीं होगा कोई नुक्सान

नई इको पर्यटन नीति की अधिसूचना जारी कर दी गई है। पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना जंगलों में मूलभूत ढांचा तैयार किया जाएगा ताकि न तो पेड़ पौधों को नुकसान हो और न ही जंगली जानवरों को भी। अधिसूचना जारी होने के बाद इस पर काम शुरू कर दिया है।

-केके पंत, अतिरिक्त मुख्य सचिव वन।

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