23.3 C
Baijnath
August 15, 2026
DESH-VIDESH

नेपाल में सियासी भूचाल: 11 साल की बच्ची के हादसे ने कैसे उखाड़ फेंकी ओली सरकार?

नेपाल में हाल के दिनों में एक अभूतपूर्व Gen-Z क्रांति ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इस क्रांति ने न केवल केपी शर्मा ओली की सरकार को सत्ता से बेदखल कर दिया, बल्कि देश में सेना को कमान संभालने के लिए मजबूर कर दिया। अब सवाल यह है कि आखिर कैसे एक 11 साल की बच्ची के साथ हुए हादसे ने नेपाल की सियासत में इतना बड़ा तूफान खड़ा कर दिया? कैसे सोशल मीडिया बैन ने जनआक्रोश को हवा दी और कैसे Gen-Z ने तख्तापलट कर दिखाया? आइए, इस पूरी कहानी को विस्तार से समझते हैं।

हादसा जो बना क्रांति की चिंगारी

कहानी की शुरुआत अगस्त 2025 में नेपाल के ललितपुर जिले के हरिसिद्धि से होती है। एक प्रांतीय मंत्री की सरकारी कार ने पैदल क्रॉसिंग पर खड़ी 11 साल की एक मासूम बच्ची को टक्कर मार दी। इस हिट-एंड-रन हादसे में बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई, लेकिन वह बच गई। स्थानीय लोगों ने ड्राइवर को पकड़ लिया, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने जनता के गुस्से को भड़का दिया। ड्राइवर को मात्र 24 घंटे में रिहा कर दिया गया, और प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने इस घटना को “मामूली” करार दे दिया।

इस बयान ने पहले से ही भ्रष्टाचार और बेरोजगारी से त्रस्त युवाओं के गुस्से को और हवा दी। बच्ची के हादसे की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए। #JusticeForTheGirl और #HatyaraSarkar जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे, जो सरकार के प्रति जनता के गुस्से का प्रतीक बन गए।

सोशल मीडिया बैन: आग में घी का काम

नेपाल में पहले से ही भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और आर्थिक बदहाली के खिलाफ युवाओं में असंतोष सुलग रहा था। विश्व बैंक के अनुसार, 2024 में नेपाल में 15-24 साल के युवाओं में बेरोजगारी दर 20.8% थी। इसके अलावा, “Nepo Kids” नामक एक सोशल मीडिया ट्रेंड ने नेताओं और उनके परिवारों की शानो-शौकत को उजागर किया, जिसने आम जनता के बीच असमानता की खाई को और गहरा कर दिया।

इसी बीच, 4 सितंबर 2025 को नेपाल सरकार ने फेसबुक, व्हाट्सएप, यूट्यूब समेत 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बैन लगा दिया। सरकार ने इसे नए नियमों के तहत पंजीकरण न करने का हवाला दिया, लेकिन युवाओं ने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला माना। यह बैन उस चिंगारी में घी डालने जैसा था, जो पहले से ही सुलग रही थी।

Gen-Z का तख्तापलट: सड़कों पर उतरा गुस्सा

8 सितंबर 2025 को नेपाल की राजधानी काठमांडू और अन्य शहरों में हजारों युवा सड़कों पर उतर आए। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे ये प्रदर्शन जल्द ही हिंसक हो गए। प्रदर्शनकारियों ने संसद भवन, सिघा दरबार और कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी। पुलिस ने आंसू गैस, पानी की बौछारें और रबर बुलेट्स का इस्तेमाल किया, लेकिन कुछ मामलों में लाइव एमुनिशन का भी उपयोग हुआ, जिसकी वजह से कम से कम 19 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हो गए।

प्रदर्शनकारी न केवल सोशल मीडिया बैन के खिलाफ थे, बल्कि वे भ्रष्टाचार, नेपोटिज्म और जवाबदेही की कमी के खिलाफ भी नारे लगा रहे थे। “No More Nepo Babies” और “KP, You Thief, Leave the Country” जैसे नारे गूंज रहे थे।

ओली का इस्तीफा और सेना का हस्तक्षेप

9 सितंबर को हालात इतने बिगड़ गए कि केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा। उनके साथ कई अन्य मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया और कुछ के घरों पर हमले हुए। ओली के इस्तीफे के बाद भी प्रदर्शन जारी रहे, और सेना को त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे सहित कई महत्वपूर्ण स्थानों पर कब्जा करना पड़ा। काठमांडू और अन्य शहरों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया।

अब तक ओली के ठिकाने का कोई पता नहीं है, और नेपाल में अंतरिम सरकार के गठन की कवायद चल रही है। काठमांडू के मेयर बलेंद्र शाह जैसे युवा नेताओं का प्रभाव बढ़ रहा है, जो Gen-Z के बीच लोकप्रिय हैं।

क्या है इस क्रांति का भविष्य?

यह Gen-Z क्रांति नेपाल के इतिहास में सबसे बड़े जनांदोलनों में से एक है। यह न केवल सोशल मीडिया की आजादी की लड़ाई है, बल्कि भ्रष्टाचार, असमानता और शासन की जवाबदेही की मांग भी है। हालांकि सोशल मीडिया बैन हटा लिया गया है, लेकिन युवाओं का गुस्सा अभी शांत नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस हिंसा की स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है।

नेपाल की इस क्रांति ने एक बार फिर साबित कर दिया कि जनता की आवाज को दबाना आसान नहीं है। एक 11 साल की बच्ची के साथ हुए हादसे ने न केवल नेपाल की सियासत को हिला दिया, बल्कि यह भी दिखाया कि Gen-Z की ताकत को कम आंकना किसी भी सरकार के लिए भारी पड़ सकता है। अब नेपाल में शांति और स्थिरता की उम्मीद की जा रही है, लेकिन सवाल यह है कि क्या यह क्रांति देश को एक नई दिशा दे पाएगी?

Related posts

1 अप्रैल से बंद होंगे इन मोबाइल नंबर से जुड़े बैंक खाते और UPI आईडी, NPCI का बड़ा फैसला।

Admin

कांग्रेस और सपा में खत्म हुईं दूरियां! ये तस्वीर बनी गवाह, राहुल संग दिखे अखिलेश के चाचा

Admin

जाते-जाते गम दे गया 2024, 31 दिसंबर की शाम पत्नी से फोन पर बात की, फिर लगाई फांसी

Admin

Leave a Comment