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October 1, 2026
Kangra

Namansh Syal: देशसेवा का जज्बा जगाने वाला योद्धा… नमंश स्याल को आंसुओं भरा श्रद्धासुमन

कांगड़ा 23 नवंबर

दुबई एयर शो के दौरान भारतीय वायुसेना के तेजस लड़ाकू विमान के दुर्घटनाग्रस्त होने से शहीद हुए विंग कमांडर नमंश स्याल को याद कर उनके पैतृक गांव और रिश्तेदारों की आंखें नम हैं। बड़े अधिकारी होने के बावजूद नमंश अपने संस्कारों और सादगी के लिए जाने जाते थे। गांव वालों का कहना है कि वह जिस किसी को भी मिलते, हर दिल में जगह बना लेते थे।

नमंश का पैतृक गांव उत्तराखंड के देहरादून जिले में है। जब भी छुट्टी मिलती, वे गांव जरूर आते। ग्रामीण बताते हैं कि गांव आने पर रोजाना सुबह बुजुर्गों के पैर छूकर आशीर्वाद लेते थे। सादा कुर्ता-पायजामा या शॉर्ट्स-टीशर्ट में रहते। शादी-ब्याह या किसी भी समारोह में सबसे आगे हाथ बंटाते। जूठे पत्तल-गिलास उठाने से कभी परहेज नहीं किया। गांव के बच्चे-युवा उन्हें देखकर हैरान रह जाते कि वायुसेना में इतने बड़े अधिकारी इतनी सादगी से रहते हैं।

गांव के अशोक कुमार कहते हैं, “नमंश इतने मिलनसार थे कि लगता ही नहीं था कि वह विंग कमांडर हैं। शादी में पूरा धाम संभालते, जूठन उठाते, मेहमानों को खिलाते-पिलाते। उनके जैसा बेटा हर गांव को मिले तो गांव का भला हो जाए।”

नमंश के जीजा अशोक कुमार भावुक स्वर में बताते हैं, “नमंश का जाना देश के साथ-साथ हमारे पूरे क्षेत्र के लिए अपूरणीय क्षति है। वह पशु-पक्षियों से भी उतना ही प्यार करते थे। घर आते तो गोशाला में घंटों समय बिताते, गायों को अपने हाथ से चारा डालते।”

युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करना उनका जुनून था। गांव के बच्चों को इकट्ठा कर कहते, “सेना में आओ, देश की सेवा करो और नशे जैसी बुराइयों से दूर रहो।” उनकी बातों का असर यह था कि गांव के कई युवा आज भारतीय सेना में हैं और नमंश को अपना आदर्श मानते हैं।

अंतिम बार करीब चार महीने पहले नमंश अपनी बेटी के साथ गांव आए थे और पूरे एक महीने यहीं रहे। उस दौरान भी उन्होंने गांव के हर घर में समय दिया, बच्चों को प्रेरित किया, बुजुर्गों से आशीर्वाद लिया। किसी ने नहीं सोचा था कि यही उनकी आखिरी मुलाकात होगी।

रविवार को जब वायुसेना के उनके साथी गांव पहुंचे तो उनकी आंखें भी नम थीं। हर कोई बस एक ही बात दोहरा रहा था – “नमंश जैसे अधिकारी और इंसान दुबारा नहीं मिलेंगे।”

गांव वाले कहते हैं, नमंश सिर्फ एक नाम नहीं थे, वे गांव की शान थे, संस्कार थे, प्रेरणा थे। उनकी यादें हमेशा जिंदा रहेंगी।

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