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September 30, 2026
Shimla

हिमाचल में ‘सुख की सरकार’ का एक और झटका: सरकारी अस्पतालों में OPD मरीजों के मुफ्त टेस्ट बंद करने की तैयारी, पर्ची के लिए भी देना होगा शुल्क

हिमाचल प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में बाह्य रोगियों (आउटडोर पेशेंट्स) के लिए मुफ्त टेस्ट की सुविधा जल्द ही खत्म हो सकती है। इसके साथ ही अब मरीजों को पर्ची के लिए भी जेब ढीली करनी पड़ेगी। स्वास्थ्य विभाग ने पर्ची का शुल्क 10 रुपये तय करने की तैयारी की है और टेस्ट की फीस लागू करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेज दिया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अंतिम फैसला राज्य सरकार को लेना है।

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार, अस्पतालों में भर्ती मरीजों के लिए मुफ्त टेस्ट की सुविधा जारी रहेगी, लेकिन ओपीडी मरीजों से शुल्क वसूलने की योजना पर विचार चल रहा है। विभाग का तर्क है कि मुफ्त टेस्ट की सुविधा शुरू होने के बाद से लोग हर महीने या तीन महीने में पूरे शरीर की जांच करा रहे हैं, जिससे सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है। साथ ही, प्रयोगशालाओं में टेस्ट रिपोर्ट लेने के लिए लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे व्यवस्था पर दबाव पड़ रहा है।

हिमाचल में वर्तमान में करीब 130 प्रकार के टेस्ट मुफ्त किए जाते हैं। लेकिन अब इस नीति में बदलाव की तैयारी है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में पहले ही ओपीडी मरीजों से ईसीजी और अल्ट्रासाउंड के लिए शुल्क वसूलना शुरू कर दिया गया है। पूर्व सरकार ने अपने कार्यकाल में सरकारी अस्पतालों में मुफ्त टेस्ट की सुविधा शुरू की थी। इसके लिए मेडिकल कॉलेजों, सिविल अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में निजी कंपनियों की प्रयोगशालाएं स्थापित की गई थीं। इन लैब में मरीजों के टेस्ट मुफ्त होते हैं, लेकिन इसका खर्च सरकार वहन करती है। हर साल सरकार को इन टेस्टों के लिए निजी कंपनी को करोड़ों रुपये का भुगतान करना पड़ता है।

हिमकेयर योजना में गड़बड़ी का खुलासा, ऑडिट शुरू
इस बीच, हिमकेयर योजना में भारी अनियमितताओं की जांच के लिए सरकार ने ऑडिट शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बजट सत्र में इसकी घोषणा की थी। आरोप हैं कि हिमकेयर योजना के तहत सर्दी-जुकाम जैसे मामूली इलाज और आंखों के ऑपरेशन के लिए हजारों रुपये के बिल बनाए गए। हर्निया के ऑपरेशन जैसे मामलों में भी लाखों रुपये के बिल सामने आए हैं। विपक्ष का दावा है कि कुछ डॉक्टरों ने इस योजना का दुरुपयोग कर अस्पतालों की बड़ी इमारतें तक खड़ी कर लीं। विधानसभा में इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी हो चुकी है।

स्वास्थ्य सचिव का बयान
स्वास्थ्य सचिव एम. सुधा देवी ने कहा, “बाह्य रोगियों से मेडिकल टेस्ट की फीस लेने का प्रस्ताव विचाराधीन है। अभी इस पर अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।”

प्रदेशवासियों का कहना है कि अगर यह प्रस्ताव लागू हुआ तो गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों पर भारी बोझ पड़ेगा। सरकार के इस कदम से स्वास्थ्य सेवाओं पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। अब सबकी नजरें सरकार के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

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