शिमला, 18 अप्रैल 2025: साइबर ठगों का जाल देशभर में तेजी से फैल रहा है, जिसमें हिमाचल प्रदेश भी बुरी तरह प्रभावित है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रतिदिन 63 करोड़ रुपये और हिमाचल में 31 लाख रुपये से अधिक की साइबर ठगी हो रही है। पिछले एक साल में देश में साइबर अपराधियों ने 22,851 करोड़ रुपये और हिमाचल में 114 करोड़ रुपये लूटे हैं। हिमाचल में हर तीसरे व्यक्ति को ठग टटोल रहे हैं, और औसतन हर पांच मिनट में एक ठगी की कॉल आ रही है।

हिमाचल में साइबर ठगी का बढ़ता ग्राफ
हिमाचल पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, बीते पांच वर्षों में साइबर थानों में 39,072 शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें 22,000 से अधिक वित्तीय ठगी से संबंधित हैं। साल 2024 में ही 114 करोड़ रुपये की ठगी हुई, जो पिछले पांच साल में कुल 156.25 करोड़ रुपये की ठगी का बड़ा हिस्सा है। साइबर ठगी के 227 मामले दर्ज किए गए, और 97 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
- ठगी के तरीके: ज्यादातर ठगी शेयर मार्केट, लॉटरी, लोन, बीमा, और ऐप-आधारित निवेश के नाम पर हो रही है। इसके अलावा, डिजिटल अरेस्ट, सेक्सटॉर्शन, और अपनों की आवाज की नकल जैसे नए हथकंडे भी अपनाए जा रहे हैं।
- शिकायतों की स्थिति: केवल 30% पीड़ित ही पुलिस में शिकायत दर्ज कराते हैं, जबकि 70% मामले सामने नहीं आते।
देश में साइबर ठगी का हाल
केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, 2021 से मार्च 2024 तक देश में 2.16 करोड़ साइबर धोखाधड़ी की शिकायतें दर्ज हुईं:
- 2021: 1,36,604 शिकायतें
- 2022: 5,13,334 शिकायतें
- 2023: 11,29,519 शिकायतें
- 2024 (मार्च तक): 3,81,854 शिकायतें
महिलाएं और बुजुर्ग साइबर ठगों के प्रमुख निशाने पर हैं। उद्यमी, कारोबारी, और वीआईपी भी ठगी का शिकार हो रहे हैं।
जागरूकता ही बचाव: डीआईजी मोहित चावला
हिमाचल सीआईडी के डीआईजी मोहित चावला ने बताया कि साइबर ठगी के ज्यादातर मामले शेयर मार्केट निवेश, पैसा दोगुना करने का लालच, और डिजिटल अरेस्ट से जुड़े हैं। औसतन हर 15 मिनट में एक शिकायत दर्ज हो रही है। उन्होंने कहा, “जागरूकता ही लोगों को ठगी से बचा सकती है। हाल के दिनों में जागरूकता बढ़ने से साइबर पुलिस को रोज 400-500 कॉल आ रही हैं, और त्वरित कार्रवाई की जा रही है।”
मजबूत कानून और तकनीक की जरूरत
सेवानिवृत्त आईपीएस और साइबर विशेषज्ञ अशोक शर्मा के अनुसार, साइबर अपराध रोकने के लिए मजबूत कानून, आधुनिक तकनीक, और जागरूकता जरूरी है। साइबर अपराधी प्रॉक्सी सर्वर का उपयोग करते हैं, जिससे उनकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल होता है। भारत का आईटी एक्ट 2000 अपराध से निपटने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसे और सख्त करना होगा। शर्मा ने सलाह दी कि संदिग्ध कॉल या मैसेज पर तुरंत 1930 पर शिकायत दर्ज करें।
हिमाचल में उच्च टेलीडेंसिटी, बढ़ता खतरा
केंद्रीय संचार मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल में टेलीडेंसिटी 120.80% है, जो देश में दिल्ली (280.78%) के बाद दूसरी सबसे अधिक है। भारत की औसत टेलीडेंसिटी 85.43% है। उच्च टेलीडेंसिटी के कारण हिमाचल साइबर अपराधियों का पसंदीदा निशाना बन रहा है।
बचाव के उपाय
- अज्ञात नंबरों से कॉल/मैसेज पर सावधानी बरतें।
- ओटीपी, पासवर्ड, या बैंक विवरण साझा न करें।
- केवल विश्वसनीय ऐप और वेबसाइट का उपयोग करें।
- ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें या चक्षु पोर्टल पर रिपोर्ट करें।
पुलिस ने 2024 में 35,86,490 रुपये होल्ड कराए और 13,49,830 रुपये रिकवर किए। साइबर ठगी रोकने के लिए जागरूकता अभियान और पुलिस कार्रवाई तेज की गई है।
नोट: साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्क रहें और संदिग्ध गतिविधियों की तुरंत रिपोर्ट करें।
