शिमला: हिमाचल प्रदेश में 34 साल बाद लैंड रिकॉर्ड मैनुअल में संशोधन की तैयारी है। वर्ष 1992 के बाद न तो कांग्रेस और न ही भाजपा सरकारों ने इस मैनुअल में कोई बदलाव किया। अब सुक्खू सरकार राजस्व विभाग के इस मैनुअल के नए संस्करण को प्रकाशित करने की दिशा में काम कर रही है।
नए मैनुअल में राजस्व विभाग के अधिकारियों और जनता के अधिकारों की विस्तृत जानकारी होगी। इसमें डिमार्केशन, जमीन का बंटवारा, ततीमा, जमाबंदी बनाए जाने के नियम, प्रमाणपत्र जारी करने की समय-सीमा और अधिकारियों की जवाबदेही शामिल होगी। यदि अधिकारी समय पर जमीन संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराते, तो उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान भी स्पष्ट किया जाएगा।
राजस्व विभाग के अनुसार, पुराने मैनुअल में बदलाव की मांग विधानसभा में भी उठती रही है। विधायकों ने सुझाव दिए, लेकिन योजना अमल में नहीं आई। इस बार कांग्रेस सरकार ने मैनुअल को अपडेट करने का फैसला लिया है। इसके लिए राजस्व जानकारों की राय ली गई और राजस्व अधिकारियों ने राजस्व मंत्री के साथ बैठक की।
अतिरिक्त मुख्य सचिव (राजस्व) ओंकार शर्मा ने बताया कि मैनुअल तैयार है और जल्द ही इसे मंजूरी के लिए कैबिनेट में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस संशोधन से जनता को राहत मिलेगी और राजस्व विभाग का कामकाज अधिक पारदर्शी व जवाबदेह होगा।
यह कदम राजस्व प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने और जनता की समस्याओं को कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
