शिमला: हिमाचल प्रदेश सरकार ने हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) को 1500 करोड़ रुपये के घाटे से उबारने के लिए बस किराए में 15 फीसदी की वृद्धि की है। इस फैसले से पहाड़ी क्षेत्रों में साधारण बसों का किराया उत्तराखंड और जम्मू से अधिक हो गया है। हिमाचल में अब प्रति किलोमीटर किराया 2.19 रुपये से बढ़ाकर 2.50 रुपये कर दिया गया है, जबकि उत्तराखंड में यह 2.20 रुपये और जम्मू में 1.33 रुपये है।
इसके अलावा, न्यूनतम किराया 5 रुपये से बढ़ाकर 10 रुपये किया गया है, और लंबी दूरी के किराए में भी बढ़ोतरी की गई है। तुलनात्मक रूप से, पंजाब में लंबी दूरी का किराया 1.45 रुपये प्रति किलोमीटर है। सरकार ने पंजाब, हरियाणा, जम्मू और उत्तराखंड के साथ एमओयू साइन किया है, जिसके तहत सीमा पार करने वाली बसों का किराया संबंधित राज्य के नियमों के अनुसार वसूला जाएगा।
HRTC की मासिक कमाई 70 करोड़ रुपये है, जबकि डीजल और बसों की मरम्मत पर 55 करोड़ और कर्मचारियों की तनख्वाह व पेंशन पर 60 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। सरकार हर साल 360 करोड़ रुपये की ग्रांट देती है, लेकिन निगम का दावा है कि सैकड़ों रूट घाटे में चल रहे हैं। फिर भी, जनता की सुविधा के लिए इन्हें चलाया जा रहा है।
हिमाचल की जनता इस किराया वृद्धि का विरोध कर रही है। पथ परिवहन निगम मजदूर संघ के उपाध्यक्ष मनोज शर्मा ने कहा कि निगम की कमाई का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों की तनख्वाह और पेंशन में चला जाता है। सर्व कर्मचारी यूनियन के महासचिव खेमेंद्र गुप्ता ने घाटे को कम करने के लिए गंभीर कदम उठाने की जरूरत बताई। HRTC के एमडी निपुण जिंदल ने पुष्टि की कि किराया वृद्धि लागू हो चुकी है।
किराया वृद्धि से जनता पर अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है, लेकिन सरकार का कहना है कि यह कदम निगम को आर्थिक संकट से निकालने के लिए जरूरी था।
