हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सरकार ने 1 जून, 2025 से माइक्रोन लिफाफों (कैरी बैग) के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। ये लिफाफे, जिन्हें अक्सर “मैं प्लास्टिक नहीं हूं” का दावा करते हुए पर्यावरण मित्र के रूप में प्रचारित किया जाता है, अब दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे। इन बैग्स को बनाने में नायलॉन, पॉली-विनायल-कार्बोहाइड्रेट्स (पीवीसी), पॉलीप्रोपाइलीन और पॉली-स्टाइरीन जैसे प्लास्टिक पदार्थों का उपयोग होता है, जो हिमाचल के ठंडे वातावरण में आसानी से विघटित नहीं होते।

प्रतिबंध का कारण
इन बैग्स को जैव-अपघटनीय (बायोडिग्रेडेबल) होने के लिए छह माह तक 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान की आवश्यकता होती है। हिमाचल प्रदेश में गर्मियों में ही इतना तापमान मिल पाता है, जबकि सर्दियों में तापमान काफी कम रहता है। इस कारण ये बैग नष्ट नहीं हो पाते और पर्यावरण प्रदूषण के साथ-साथ कचरे के अव्यवस्थित फैलाव को बढ़ावा देते हैं। पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार ने इन्हें प्रतिबंधित करने का फैसला किया है।
क्या होगा प्रभाव?
वर्तमान में प्रदेश के अधिकांश दुकानदार एकल-उपयोग (सिंगल-यूज) माइक्रोन कैरी बैग्स का उपयोग कर रहे हैं। इन बैग्स का बड़ा स्टॉक दुकानदारों के पास मौजूद है, लेकिन 31 मई, 2025 के बाद इनका उपयोग पूरी तरह बंद हो जाएगा। इसके बाद इनके प्रयोग पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
13 विभागों को सौंपी गई जिम्मेदारी
प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार ने 13 विभागों को कार्रवाई का अधिकार दिया है। इनमें राजस्व, पुलिस, शहरी विकास, स्वास्थ्य, राज्य कर एवं आबकारी, वन, पर्यावरण विज्ञान प्रौद्योगिकी एवं जलवायु परिवर्तन, पर्यटन, खाद्य नागरिक आपूर्ति, ग्रामीण विकास व पंचायती राज, पथ परिवहन निगम, भाषा एवं संस्कृति, और उद्योग विभाग शामिल हैं। ये विभाग दुकानों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में औचक निरीक्षण करेंगे और नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करेंगे।
अधिकारी का बयान
सोलन के खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक श्रवण हिमालयन ने कहा, “हिमाचल जैसे राज्य में ये बैग नष्ट नहीं हो पाते, क्योंकि यहां का तापमान इनके विघटन के लिए पर्याप्त नहीं है। इन बैग्स को बायोडिग्रेडेबल होने के लिए छह माह तक 35 से 40 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरत होती है। इसलिए 1 जून से इन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जा रहा है।”
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम
यह प्रतिबंध हिमाचल प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का यह निर्णय न केवल पर्यावरण को स्वच्छ रखने में मदद करेगा, बल्कि दुकानदारों और आम जनता को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने में भी सहायक होगा।
