शिमला: हिमाचल प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीपीसीएल) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की संदिग्ध मौत के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट ने जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। इस फैसले के बाद पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता और आपसी तनातनी का मुद्दा गहरा गया है, जिसमें डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा और एसपी शिमला संजीव कुमार गांधी पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सोमवार को इस मामले पर फैसला ले सकते हैं और उनकी राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से मुलाकात भी प्रस्तावित है।
पुलिस विभाग में अभूतपूर्व तनाव
हिमाचल पुलिस के इतिहास में पहली बार किसी एसपी ने डीजीपी के खिलाफ इतने बड़े स्तर पर मोर्चा खोला है। एसपी शिमला संजीव कुमार गांधी ने डीजीपी डॉ. अतुल वर्मा पर आरोप लगाया है कि उन्होंने हाईकोर्ट में गलत और गैर-जिम्मेदार हलफनामा दाखिल किया, जिसके कारण विमल नेगी मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी गई। गांधी ने डीजीपी कार्यालय को चिट्टा तस्करी से जोड़ने का भी गंभीर आरोप लगाया है। दूसरी ओर, डीजीपी ने एसपी पर ऑल इंडिया सर्विसेज कंडक्ट रूल्स के उल्लंघन का हवाला देते हुए उनके निलंबन की मांग की है।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान डीजीपी ने अपनी स्थिति रिपोर्ट में शिमला पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए थे, जिसे एसपी गांधी ने अपनी प्रोफेशनल अखंडता पर हमला माना। इस आपसी खींचतान ने नौकरशाही में गहरे मतभेदों को उजागर किया है।
विमल नेगी मामला: पृष्ठभूमि
विमल नेगी 10 मार्च 2025 को लापता हो गए थे और 18 मार्च को उनका शव बिलासपुर के गोविंदसागर डैम से बरामद हुआ था। उनके परिवार ने कार्यस्थल पर उत्पीड़न (workplace harassment) का आरोप लगाते हुए एचपीपीसीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर हरीकेश मीणा, डायरेक्टर पर्सनल शिवम प्रताप और डायरेक्टर देशराज के खिलाफ जांच की मांग की थी। परिवार की याचिका पर हाईकोर्ट ने 23 मई 2025 को सीबीआई जांच का आदेश दिया, जिसमें हिमाचल कैडर के किसी भी अधिकारी को जांच टीम में शामिल न करने का निर्देश दिया गया।
राजनीतिक तूल और सीबीआई जांच
विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस मामले को लेकर सुक्खू सरकार पर सबूत नष्ट करने और जांच में देरी का आरोप लगाया है। पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार ने शुरू से ही सीबीआई जांच से इनकार किया, जिससे संदेह बढ़ा। उन्होंने मुख्यमंत्री से नैतिकता के आधार पर इस्तीफे की मांग की है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने विपक्ष पर मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाया और कहा कि उनकी सरकार निष्पक्ष जांच के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने अप्रैल में कहा था कि अगर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) नादौन में छापेमारी कर सकता है, तो सीबीआई को जांच से कोई नहीं रोक रहा। हालांकि, हाईकोर्ट के फैसले के बाद सरकार के राजस्व मत्री जगत सिंह नेगी ने सीबीआई की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए, जिससे विवाद और गहरा गया।
मुख्यमंत्री-राज्यपाल मुलाकात
सोमवार को मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल से शिष्टाचार भेंट प्रस्तावित है। इस दौरान वे पुलिस विभाग में अनुशासनहीनता, विमल नेगी मामले और अन्य मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, डीजीपी और एसपी के बीच तनातनी को देखते हुए सरकार कठोर कदम उठा सकती है।
निष्कर्ष
विमल नेगी की मौत का मामला न केवल एक जांच का विषय बन गया है, बल्कि यह पुलिस विभाग और सरकार के लिए भी संकट का कारण बन रहा है। हाईकोर्ट के सीबीआई जांच के आदेश और पुलिस अधिकारियों की आपसी कलह ने हिमाचल में सियासी और प्रशासनिक माहौल को गरमा दिया है। जनता और विमल नेगी के परिवार को अब सीबीआई जांच से सत्य सामने आने की उम्मीद है।
