बिलासपुर: हिमाचल प्रदेश के राजकीय हाइड्रो इंजीनियरिंग कॉलेज, बंदला (बिलासपुर) के निदेशक सह प्राचार्य को यौन उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार के आरोपों के बाद राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। मंगलवार को तकनीकी शिक्षा मंत्री राजेश धर्माणी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ऐसी घटनाएं अस्वीकार्य हैं और सरकार इस तरह के मामलों में सख्त कार्रवाई करेगी।
आरोप है कि प्राचार्य हिमांशु मोंगा ने कई छात्राओं के साथ अनुचित व्यवहार किया, जिसमें आपत्तिजनक संदेश भेजना और धमकियां देना शामिल है। मामले की जांच के लिए तकनीकी शिक्षा विभाग ने 21 अप्रैल को तीन महिला सदस्यों की यौन उत्पीड़न जांच समिति गठित की थी। समिति ने करीब तीन दर्जन छात्राओं से बातचीत की और प्राचार्य द्वारा भेजे गए संदेशों सहित अन्य साक्ष्य जुटाए। समिति की रिपोर्ट प्राचार्य के खिलाफ गई, जिसके आधार पर निलंबन की कार्रवाई की गई।
मामले की शुरुआत 8 अप्रैल को सुंदरनगर इंजीनियरिंग कॉलेज के एक पूर्व छात्र की शिकायत से हुई, जिसने समग्र ई-समाधान पोर्टल पर प्राचार्य पर अनुचित व्यवहार का आरोप लगाया। शिकायत में कहा गया कि प्राचार्य ने सुंदरनगर कॉलेज में संकाय सदस्य रहते हुए भी छात्राओं के साथ दुर्व्यवहार किया था, और यह व्यवहार बिलासपुर के हाइड्रो कॉलेज में भी जारी रहा।
22 मई को मामला तब तूल पकड़ा जब प्राचार्य का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें वह अस्पताल में भर्ती एक छात्रा के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ करते दिखाई दिए। इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं ने कॉलेज गेट पर पांच घंटे तक धरना-प्रदर्शन किया और “हिमांशु मोंगा मुर्दाबाद” व “वी वांट जस्टिस” जैसे नारे लगाए। उसी रात पुलिस ने एक छात्रा की शिकायत पर प्राचार्य के खिलाफ यौन उत्पीड़न का मामला दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया। यह घटना मार्च 2024 की बताई जा रही है।
बिलासपुर के पुलिस अधीक्षक संदीप धवल ने बताया कि प्राचार्य को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई, और वह वर्तमान में जमानत पर हैं। पुलिस मामले की अलग से जांच कर रही है, जिसमें पीड़िता और अन्य गवाहों के बयान दर्ज किए गए हैं।
तकनीकी शिक्षा विभाग के निदेशक अक्षय सूद ने कहा कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। जांच समिति की अध्यक्ष डॉ. विभा शर्मा ने बताया कि सभी पक्षों के बयान दर्ज करने के बाद रिपोर्ट विभाग को सौंप दी गई है।
छात्र-छात्राओं ने मांग की है कि प्राचार्य के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो और कॉलेज में छात्राओं की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। इस मामले ने शिक्षा संस्थानों में सुरक्षा और जवाबदेही के मुद्दों को फिर से चर्चा में ला दिया है।
