बैजनाथ (कांगड़ा): हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले की पैराग्लाइडिंग घाटी बीड़ बिलिंग की चार पंचायतों—गुनेहड़, क्योर, बीड़ और चौगान—के ग्रामीणों ने नगर पंचायत गठन के प्रस्ताव के खिलाफ सोमवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीण किसान संघर्ष समिति के बैनर तले सैकड़ों ग्रामीणों ने चौगान, क्योर और गुनेहड़ में रैली निकाली और क्योर की लैंडिंग साइट पर काले झंडे लेकर धरना-प्रदर्शन किया। इस दौरान जमकर नारेबाजी की गई।
समिति के अध्यक्ष देशराज और उपाध्यक्ष विचित्र सिंह ने बताया कि सरकार कुछ पंचायत प्रधानों के जरिए नगर पंचायत की प्रक्रिया को आगे बढ़ा रही है, लेकिन ग्रामीण इसका पुरजोर विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह क्षेत्र पूरी तरह ग्रामीण है, जहां लोगों की आजीविका मुख्य रूप से खेतीबाड़ी और मजदूरी पर निर्भर है। चारों पंचायतों में 315 परिवार गरीबी रेखा से नीचे हैं और कई गांवों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं हैं। 2024-25 में मनरेगा के तहत 21013 रोजगार दिवस सृजित किए गए, जिनकी मजदूरी 63 लाख 3 हजार 900 रुपये रही, जो ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति को दर्शाता है।
ग्रामीणों ने पहले भी बैजनाथ उपमंडल अधिकारी (एसडीएम) कार्यालय में प्रदर्शन कर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपा था। समिति ने जिला प्रशासन, एसडीएम और स्थानीय विधायक किशोरी लाल से बार-बार गुहार लगाई कि इस ग्रामीण क्षेत्र को नगर पंचायत न बनाया जाए। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि सरकार इस प्रक्रिया को नहीं रोकती, तो वे विधानसभा चुनावों का बहिष्कार करेंगे।
प्रदर्शन में समिति के अध्यक्ष देशराज, सचिव विचित्र सिंह, उपप्रधान मोहर सिंह, कोषाध्यक्ष भाग सिंह, ब्लॉक समिति सदस्य राज कुमार, क्योर पंचायत प्रधान शिव कुमार, गुनेहड़ पंचायत प्रधान अंजना देवी, बड़ा भंगाल पंचायत प्रधान मनसा राम, चौगान उपप्रधान भूमि चंद, महिला मंडल प्रधान मीनाक्षी, बीना देवी, सुमना देवी, सोनू देवी, बिमला देवी, पूर्व प्रधान सुरेश कुमार, स्वर्णा देवी सहित सैकड़ों ग्रामीण शामिल रहे।
प्रशासन ने पूर्व में एसडीएम की अध्यक्षता में बैठकों का आयोजन किया था, जिसमें बीड़ और चौगान पंचायतों ने नगर पंचायत के लिए एनओसी दे दी, लेकिन गुनेहड़ और क्योर पंचायतें लगातार विरोध कर रही हैं। प्रशासन का कहना है कि नगर पंचायत बनने से क्षेत्र को प्रति वर्ष 6 से 8 करोड़ रुपये विकास के लिए मिल सकते हैं, मगर ग्रामीणों का कहना है कि यह उनकी आजीविका और ग्रामीण पहचान के लिए खतरा है।
