बैजनाथ 2 मई 2025
वैजनाथ-चौबीन मार्ग पर बंडिया में सड़क दुर्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा। रविवार को तेज रफ्तार मोटरसाइकिल की टक्कर से 70 वर्षीय कौशल्या देवी की मौत हो गई। यह इस क्षेत्र में पांचवीं ऐसी घटना है, जहां तेज गति से चलने वाले वाहनों ने लोगों की जान ले ली। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ने न तो गति अवरोधक (स्पीड ब्रेकर) लगाए और न ही स्पीड लिमिट के चेतावनी बोर्ड।
कौशल्या देवी, जो आंगनबाड़ी सहायिका के रूप में सेवानिवृत्त थीं और मसाला फैक्ट्री में काम करती थीं, रविवार को फैक्ट्री से कुछ मीटर दूर अपने घर खाना खाने आई थीं। लौटते समय सड़क पर एक नाबालिग बाइक सवार ने उन्हें टक्कर मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। कौशल्या ने मेहनत कर अपने दो बेटियों और एक बेटे की परवरिश की थी। उनके पति की पहले ही मृत्यु हो चुकी है।
पहले भी हो चुके हैं हादसे
बंडिया में यह कोई पहला हादसा नहीं है। डेढ़ साल पहले पंचायत के पूर्व प्रधान संजय भाटिया के 17 वर्षीय बेटे की भी सड़क पार करते समय वाहन की चपेट में आने से मौत हो गई थी। संजय भाटिया ने बताया कि यह मार्ग अब “मौत का मार्ग” बन गया है। स्थानीय लोग कई बार स्पीड ब्रेकर और चेतावनी बोर्ड लगाने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि पीडब्ल्यूडी ने कुछ समय पहले लगाए गए स्पीड ब्रेकर भी कुछ ही दिनों में उखड़ गए।
नाबालिग चला रहा था बाइक
पुलिस के अनुसार, हादसे के समय मोटरसाइकिल नाबालिग सचिन कुमार चला रहा था, जो कुदैल का निवासी है। उसने चौबीन पोस्ट ऑफिस में कार्यरत सोनीपत के एक युवक की बाइक ली थी। डीएसपी बैजनाथ अनिल शर्मा ने बताया कि बाइक मालिक के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारियों का बयान
पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता अजय सूद ने कहा कि स्पीड लिमिट के बोर्ड लगाए गए हैं, लेकिन अब पहले जैसे बड़े स्पीड ब्रेकर नहीं बनाए जा सकते। पुलिस के साथ चर्चा कर नियमों के तहत गति अवरोधक और अन्य आवश्यक बोर्ड लगाए जाएंगे। डीएसपी अनिल शर्मा ने बताया कि तेज रफ्तार वाहनों पर नजर रखने के लिए कैमरे लगाए जाएंगे और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई होगी। इस ब्लैक स्पॉट पर पीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर उचित कदम उठाए जाएंगे।
लोगों में आक्रोश
स्थानीय लोगों में प्रशासन और पीडब्ल्यूडी की लापरवाही को लेकर गुस्सा है। उनका कहना है कि अगर समय रहते उचित कदम उठाए गए होते, तो कई अनमोल जिंदगियां बच सकती थीं।
