शिमला (संवाददाता): हिमाचल प्रदेश में 2000 करोड़ रुपये की क्रिप्टो करेंसी निवेश योजना ठगी के मुख्य आरोपी सुभाष शर्मा को शिमला के विशेष न्यायाधीश ने उद्घोषित अपराधी (प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर) घोषित कर दिया है। मंडी जिले के भगवाहन मोहल्ला, मकान नंबर 86/9, निवासी सुभाष शर्मा पर 80,000 से अधिक लोगों को क्रिप्टो करेंसी में भारी मुनाफे का लालच देकर उनकी गाढ़ी कमाई हड़पने का आरोप है।
लगभग दो वर्ष पहले यह मामला सामने आने के बाद सुभाष शर्मा अपनी पत्नी और बेटे के साथ दुबई भाग गया था। विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार के समक्ष चल रहे इस मामले में सुभाष के खिलाफ दो बार गिरफ्तारी वारंट जारी किए गए, लेकिन उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद पुलिस ने उसे भगोड़ा घोषित करने के लिए न्यायालय में आवेदन किया था।
न्यायालय में सुनवाई और उद्घोषणा प्रक्रिया
2 जून, 2025 को हुई सुनवाई में सुभाष शर्मा फिर से कोर्ट में पेश नहीं हुआ। इससे पहले न्यायालय ने उसे पेश होने के लिए उद्घोषणा आदेश जारी किया था, जिसे निष्पादित करने की जिम्मेदारी धर्मशाला थाने के कॉन्स्टेबल विनोद कुमार को सौंपी गई थी। विनोद कुमार ने कोर्ट को बताया कि 24 अप्रैल को उद्घोषणा की तीन प्रतियां नियमानुसार सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा की गई थीं।
पहली प्रति सुभाष के स्थायी निवास, ग्राम पिंगला, तहसील सरकाघाट, जिला मंडी में उनके घर के बाहर, गवाह उप-प्रधान विनोद कुमार की मौजूदगी में चिपकाई गई। दूसरी प्रति पंचायत पिंगला के नोटिस बोर्ड पर वार्ड सदस्य सुनीता देवी की उपस्थिति में और तीसरी प्रति शिमला के विशेष न्यायाधीश के नोटिस बोर्ड पर कॉन्स्टेबल गौरव शर्मा की मौजूदगी में चस्पा की गई।
न्यायालय का आदेश
कॉन्स्टेबल विनोद कुमार द्वारा प्रस्तुत उद्घोषणा की रिपोर्ट और बयानों की समीक्षा के बाद विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार ने पाया कि सुभाष शर्मा जानबूझकर न्यायिक प्रक्रिया से बच रहा है। इसके आधार पर उसे उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया। कोर्ट ने आदेश दिया कि इस निर्णय की एक प्रति शिमला के पुलिस अधीक्षक को भेजी जाए, ताकि सुभाष शर्मा का नाम उद्घोषित अपराधी रजिस्टर में दर्ज हो। साथ ही, इस कार्यवाही को समाप्त कर आदेश को मुख्य केस फाइल के साथ टैग करने का निर्देश दिया गया।
ठगी का मामला और जांच
हिमाचल पुलिस ने इस मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था, जिसकी अगुवाई डीआईजी उत्तरी रेंज अभिषेक दुल्लर ने की। SIT ने अब तक 73 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की है और 35 करोड़ रुपये की संपत्ति फ्रीज की है। सुभाष शर्मा की मंडी और जीरकपुर में 3 करोड़ रुपये की संपत्ति भी जब्त की गई है। पुलिस ने सुभाष को भारत वापस लाने के लिए रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की है, जिसमें केंद्रीय जांच एजेंसियों की मदद ली जा रही है।
प्रदेश में ठगी का दायरा
यह ठगी 2018-19 से शुरू हुई थी, जिसमें मंडी, हमीरपुर, कांगड़ा, ऊना, बिलासपुर, शिमला और सोलन जिलों के लोग प्रभावित हुए। शातिरों ने फर्जी वेबसाइट और मल्टी-लेवल मार्केटिंग (MLM) के जरिए लोगों को पैसा दोगुना करने का लालच दिया। SIT की जांच में 2500 करोड़ रुपये से अधिक के लेन-देन का पता चला है, जिसमें 2.5 लाख फर्जी आईडी बनाई गई थीं।
पुलिस ने अब तक 78 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से 74 हिमाचली और 4 गैर-हिमाचली हैं। सुभाष शर्मा के खिलाफ लुकआउट नोटिस भी जारी है, और पुलिस उसे दुबई से भारत लाने की कोशिश में जुटी है।
