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August 16, 2026
Religious

आज का पंचांग 8 जून 2025 , रवि प्रदोष व्रत पर भगवान शिव की पूजा से मिलेगी कृपा, जानें शुभ-अशुभ मुहूर्त

आज यानी 8 जून 2025 को ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि पर रवि प्रदोष व्रत मनाया जा रहा है। यह दिन भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा-अर्चना के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को सभी डरों से मुक्ति मिलती है और शिव जी की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, इस दिन अन्न, धन और अन्य आवश्यक वस्तुओं का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। आइए, एस्ट्रॉलजर आनंद सागर पाठक के अनुसार आज के पंचांग और शुभ-अशुभ मुहूर्त के बारे में विस्तार से जानते हैं।

आज का पंचांग (Aaj Ka Panchang 8 June 2025)

•  तिथि: शुक्ल द्वादशी (प्रात: 07:17 बजे तक, इसके बाद त्रयोदशी शुरू)

•  मास (पूर्णिमांत): ज्येष्ठ

•  योग: परिघ (दोपहर 12:18 बजे तक)

•  करण:

•  बलव (प्रात: 07:17 बजे तक)

•  कौलव (रात्रि 08:28 बजे तक)

•  नक्षत्र:

•  स्वाति नक्षत्र (दोपहर 12:42 बजे तक)

•  इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू

•  नक्षत्र विशेषताएं: स्वाति नक्षत्र के जातक स्वतंत्र स्वभाव, सभ्य व्यवहार, बुद्धिमान, आत्मनियंत्रण, संवेदनशील, दयालु और आकर्षक व्यक्तित्व के धनी होते हैं। इसका स्वामी राहु, राशि स्वामी शुक्र और देवता वायु देव (पवन देवता) हैं, प्रतीक हवा में झुकती हुई नई कली है।

•  सूर्योदय: सुबह 05:23 बजे

•  सूर्यास्त: शाम 07:18 बजे

•  चंद्रोदय: शाम 04:50 बजे

•  चंद्रास्त: 9 जून को रात 03:31 बजे

शुभ और अशुभ मुहूर्त

शुभ समय अवधि

•  अभिजीत मुहूर्त: प्रात: 11:52 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक
(यह समय नए कार्यों की शुरुआत और शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त है।)

अशुभ समय अवधि

•  गुलिक काल: दोपहर 03:49 बजे से शाम 05:33 बजे तक
(इस दौरान कोई भी शुभ कार्य शुरू न करें।)

•  यमगंडा: दोपहर 12:20 बजे से शाम 07:18 बजे तक
(इस समय में सावधानी बरतें।)

•  राहु काल: शाम 05:33 बजे से शाम 07:18 बजे तक
(राहु काल में शुभ कार्यों से परहेज करें।)

रवि प्रदोष व्रत का महत्व

शिव पुराण के अनुसार, प्रदोष व्रत हर महीने दो बार (शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि पर) मनाया जाता है। आज 8 जून को पड़ने वाला रवि प्रदोष व्रत विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह रविवार को होने के कारण सूर्य और शिव की कृपा दोनों को आकर्षित करता है। इस दिन संध्या काल में भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करने का विधान है।

रवि प्रदोष व्रत की पूजा विधि

1.  सुबह की तैयारी: प्रात: जल्दी उठकर स्नान करें और साफ कपड़े पहनें।

2.  संकल्प: मंदिर जाकर व्रत का संकल्प लें।

3.  पूजा सामग्री: भगवान शिव को बेलपत्र, जल, दूध, शहद, दही और घी अर्पित करें। दीपक और धूप जलाएं, फूल चढ़ाएं।

4.  मंत्र जप: “ॐ नमः शिवाय” मंत्र को 108 बार जपें। साथ ही सूर्य देव के लिए “ॐ घृणिः सूर्याय नमः” मंत्र का जाप करें।

5.  उपवास: पूरे दिन उपवास रखें। आप अपनी श्रद्धा के अनुसार फलाहार या निरjala व्रत कर सकते हैं।

6.  सूर्य पूजा: सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें और लाल फूल चढ़ाएं।

7.  दान: संभव हो तो जरूरतमंदों को खाना खिलाएं और आवश्यक सामग्री दान करें।

प्रदोष व्रत के दिन शिव जी के 108 नामों का जप करने से पूजा का पूरा फल मिलता है और रुके हुए कार्य पूरे होने की संभावना बढ़ती है। साथ ही, इस दिन दान-पुण्य के कार्यों से जीवन में शुभता और समृद्धि आती है। राहु काल और अन्य अशुभ मुहूर्तों से बचकर शुभ कार्यों को संपन्न करने की सलाह दी जाती है।

इसलिए, आज के शुभ मुहूर्त का लाभ उठाएं और भगवान शिव की कृपा प्राप्त करें।

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