चंबा, 4 सितंबर 2025: हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में भारी बारिश, भूस्खलन और बादल फटने की घटनाओं ने भयंकर तबाही मचाई है। 24 अगस्त से 3 सितंबर तक चली इस प्राकृतिक आपदा में 42 लोगों की मौत हो चुकी है, 33 लोग घायल हुए हैं, और 4 लोग लापता हैं। मणिमहेश यात्रा के दौरान 16 श्रद्धालुओं की जान चली गई, जो इस त्रासदी का सबसे दर्दनाक पहलू रहा। आपदा से जिले को करीब 368 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसमें घर, दुकानें, और बुनियादी ढांचा तबाह हो गया।
मणिमहेश यात्रा में 16 श्रद्धालुओं की मौत
मणिमहेश यात्रा के दौरान कुगती ट्रैक और डल झील मार्ग पर ऑक्सीजन की कमी और पत्थर गिरने जैसी घटनाओं ने 16 श्रद्धालुओं की जान ले ली। मृतकों में पंजाब, हरियाणा और हिमाचल के लोग शामिल हैं। खराब मौसम और बंद सड़कों के कारण कई शव दिनों तक भरमौर और कुगती में फंसे रहे, जिन्हें बाद में सेना और प्रशासन ने हेलिकॉप्टर से निकालकर परिजनों तक पहुंचाया।
274 घर ढहे, 236 पशु मरे
आपदा ने चंबा के बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया। जिला आपदा प्रबंधन की रिपोर्ट के अनुसार, 274 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हुए, जिनमें 25 मकान पूरी तरह ढह गए। इसके अलावा, 19 दुकानें, 15 पुल-पुलिया, 183 गोशालाएं और 69 चरान नष्ट हुए। पशुधन को भी भारी क्षति हुई, जिसमें 236 पशु मारे गए।
368 करोड़ का आर्थिक नुकसान
प्राकृतिक आपदा ने सरकारी और निजी संपत्तियों को गहरी चोट पहुंचाई। लोक निर्माण विभाग को 218.58 करोड़, जल शक्ति विभाग को 120.87 करोड़, विद्युत बोर्ड को 6.30 करोड़, राष्ट्रीय राजमार्ग को 2.02 करोड़, उच्च शिक्षा विभाग को 61.80 लाख, प्राथमिक शिक्षा विभाग को 46.25 लाख, मत्स्य पालन विभाग को 34.21 लाख और कृषि विभाग को 1.23 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कुल मिलाकर, जिले को लगभग 368 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान दर्ज किया गया।
सड़कों के बंद होने से राहत कार्य प्रभावित
जिले के अधिकांश सड़क मार्ग आपदा की भेंट चढ़ गए, जिससे राहत और बचाव कार्यों में भारी कठिनाइयां आईं। चंबा-पठानकोट एनएच और बनीखेत-डलहौजी-खजियार मार्ग खुले हैं, जबकि चंबा-खजियार मार्ग केवल छोटे वाहनों के लिए आंशिक रूप से खुला है। चंबा-भरमौर एनएच, चंबा-होली, चंबा-भटियात, चंबा-सलूणी, चंबा-तीसा और चंबा-पांगी मार्ग अभी भी बंद हैं।
प्रशासन और सेना के प्रयास
सेना, एनडीआरएफ और जिला प्रशासन ने राहत कार्यों में कोई कसर नहीं छोड़ी। हेलिकॉप्टरों की मदद से फंसे लोगों और शवों को निकाला गया, लेकिन सड़कों के बंद होने से राहत सामग्री पहुंचाने में मुश्किलें आईं। प्रशासन नुकसान की भरपाई के लिए युद्धस्तर पर काम कर रहा है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि इसमें कई साल लग सकते हैं।
बेघर परिवारों का दर्द
सैकड़ों परिवार बेघर हो गए हैं, और प्रभावित इलाकों में लोग डर के साये में जी रहे हैं। प्रशासन ने अस्थायी आश्रय और राहत सामग्री उपलब्ध कराने की कोशिश की है, लेकिन हालात सामान्य होने में अभी समय लगेगा।
चंबा की इस त्रासदी ने न केवल जिंदगियों को छीना, बल्कि जिले की आर्थिक और सामाजिक संरचना को भी गहरी चोट पहुंचाई है। प्रशासन और केंद्र सरकार से प्रभावितों को तत्काल राहत और पुनर्वास की मांग तेज हो रही है।
