सोलन 21 सितंबर 2025: हिमाचल प्रदेश के दवा उद्योगों पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और राज्य दवा नियंत्रकों की सख्त जांच में कुल 94 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता मानकों पर फेल साबित हुए हैं। इनमें से तीन दवाएं तो पूरी तरह नकली भी निकलीं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि हृदय रोग, उच्च रक्तचाप (हाई बीपी), एसिडिटी, बुखार और आर्थराइटिस जैसी आम बीमारियों के इलाज के लिए इस्तेमाल होने वाली दवाएं इस सूची में प्रमुखता से शामिल हैं।
अगस्त अलर्ट में 38 दवाएं खरी नहीं उतरीं
अगस्त माह के ड्रग अलर्ट में हिमाचल के 31 फार्मा प्लांट्स से बनी 38 दवाओं के सैंपल फेल हो गए। इनमें बद्दी, सिरमौर, पांवटा साहिब और नालागढ़ जैसे प्रमुख औद्योगिक केंद्रों के उत्पाद शामिल हैं। इसके अलावा, अन्य राज्यों जैसे उत्तराखंड, पंजाब और मध्य प्रदेश (इंदौर) से आई 56 दवाओं के सैंपल भी जांच में कमजोर पाए गए। राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने बताया, “ये दवाएं बाजार में आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं, लेकिन उनकी गुणवत्ता पर सवाल उठना गंभीर मुद्दा है। अवैध निर्माता अक्सर नामचीन ब्रांड्स की नकल करके हृदय और बीपी की दवाओं को बाजार में उतार देते हैं।”
फेल सैंपल्स की प्रमुख सूची: हिमाचल केंद्रित
- बद्दी (हिमाचल): ओमेगा-3 फैटी एसिड कैप्सूल (हृदय स्वास्थ्य के लिए) और पांच प्रकार के सिरप (बुखार, खांसी आदि के लिए)।
- सिरमौर जिला: डेक्सामेथासोन सोडियम फॉस्फेट इंजेक्शन (आर्थराइटिस और सूजन के इलाज में)।
- पांवटा साहिब: एमिकासिन सल्फेट इंजेक्शन (मूत्र मार्ग संक्रमण के लिए)।
- नालागढ़: ट्रामाडोल हाइड्रोक्लोराइड कैप्सूल (दर्द निवारक)।
अन्य राज्यों की दवाएं भी फेल
- उत्तराखंड: मिर्गी रोधी दवा, सीने की जलन की दवा, कैल्शियम-विटामिन डी सप्लीमेंट और हाई बीपी की एक प्रमुख दवा।
- पंजाब: हृदय रोग और माइग्रेन के इलाज वाली दवा।
- इंदौर (मध्य प्रदेश): प्रसव के दौरान इस्तेमाल होने वाला इंजेक्शन।
ये सैंपल्स एसिडिटी, पेट के अल्सर, पेट के कीड़ों, सूजन और अन्य सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़े हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी दवाओं की खराब गुणवत्ता से मरीजों की जान को खतरा हो सकता है, खासकर क्रॉनिक बीमारियों में।
सरकार की कार्रवाई: नोटिस और बैच रिकॉल
फेल सैंपल्स वाले सभी उद्योगों को तत्काल नोटिस जारी कर दिए गए हैं। निर्देश हैं कि संबंधित बैचों को बाजार से तुरंत वापस बुलाया जाए। राज्य दवा नियंत्रक मनीष कपूर ने चेतावनी दी, “जिन इकाइयों के उत्पाद लगातार फेल हो रहे हैं, उनकी गहन जांच होगी और कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। केंद्र और राज्य स्तर पर नकली दवाओं पर नजर रखी जा रही है।” CDSCO ने भी सभी राज्यों को अलर्ट जारी कर सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं।
मरीजों के लिए सलाह: सावधानी बरतें
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि दवाएं खरीदते समय हमेशा विश्वसनीय स्रोतों से लें और एक्सपायरी डेट चेक करें। हिमाचल जैसे फार्मा हब में बनी दवाओं पर भले ही भरोसा हो, लेकिन हाल की घटनाएं सतर्कता की मांग करती हैं। यदि कोई दवा संदिग्ध लगे, तो तुरंत डॉक्टर या नियामक से संपर्क करें।
यह मामला न केवल हिमाचल के फार्मा सेक्टर के लिए झटका है, बल्कि पूरे देश की दवा सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। क्या ये फेल सैंपल्स महज टिप ऑफ द आइसबर्ग हैं? आने वाले दिनों में और खुलासे हो सकते हैं।
