आधुनिक जीवनशैली में स्क्रीन की लत से बच्चों की आँखों पर संकट
आज की तेज़-रफ़्तार दुनिया में मोबाइल और लैपटॉप हमारी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बन गए हैं, लेकिन इनकी चमकती स्क्रीनें हमारी आँखों की रोशनी छीन रही हैं। खासकर बच्चे, जो खेल के मैदानों से ज़्यादा मोबाइल स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं, उनकी आँखों पर बुरा असर पड़ रहा है। ऊना के क्षेत्रीय अस्पताल में आँखों की समस्याओं से जूझ रहे मरीजों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है, जिसमें बच्चे भी शामिल हैं।
स्क्रीन टाइम का बढ़ता बोझ
नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक स्क्रीन पर नज़रें गड़ाए रखने से मायोपिक पैरालाइसिस और ड्राई आई सिंड्रोम जैसी बीमारियाँ आम हो रही हैं। पढ़ाई या काम के लिए दिन में 7-8 घंटे स्क्रीन के सामने बिताने वाले लोग इसकी सबसे ज़्यादा चपेट में हैं। रात के अंधेरे में मोबाइल चलाने की आदत और प्राकृतिक रोशनी से दूरी आँखों की सेहत को और नुकसान पहुँचा रही है।
पलकें झपकना भूल रहे लोग
डॉ. अंकुश शर्मा, नेत्र विशेषज्ञ, बताते हैं कि सामान्य तौर पर इंसान हर मिनट में 20-25 बार पलकें झपकता है, लेकिन स्क्रीन के सामने यह संख्या घटकर 5-7 रह जाती है। इससे आँखों की नमी कम हो जाती है, जिसका सीधा असर रोशनी पर पड़ता है। बच्चे अब खेलकूद छोड़कर मोबाइल गेम्स में खोए रहते हैं, जिससे उनकी शारीरिक गतिविधियाँ और आँखों की सेहत दोनों प्रभावित हो रही हैं।
आँखों को बचाने के आसान उपाय
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि स्क्रीन पर काम करते समय हर 30 मिनट में कुछ देर के लिए नज़रें हटाकर दूर की किसी चीज़ को देखें। यह आँखों की मांसपेशियों के लिए व्यायाम का काम करता है। सिरदर्द, आँखों में जलन या धुंधलापन महसूस होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 40 की उम्र के बाद नियमित आँखों की जाँच करवाना बेहद ज़रूरी है।
विटामिन-ए है आँखों का दोस्त
आँखों की रोशनी बनाए रखने के लिए विटामिन-ए से भरपूर आहार, जैसे मौसमी फल, हरी सब्जियाँ और सलाद, को अपनी डाइट में शामिल करें। रात को सोने से पहले ठंडे पानी से आँखें धोना और मोबाइल से दूरी बनाना भी कारगर उपाय है।
तकनीक और सेहत में संतुलन ज़रूरी
ऊना अस्पताल में रोज़ाना 100 से ज़्यादा मरीज़ आँखों की समस्याओं के साथ पहुँच रहे हैं। डॉ. अंकुश का कहना है कि तकनीक का इस्तेमाल ज़रूरी है, लेकिन इसके साथ सेहत का ख्याल रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आँखों को चैन देने के लिए समय-समय पर स्क्रीन से ब्रेक लें और प्रकृति के करीब रहें। आइए, अपनी और अपने बच्चों की आँखों की रोशनी को बचाने के लिए आज से ही सही आदतें अपनाएँ।
