शिमला, 22 नवंबर 2025: हिमाचल प्रदेश में होने वाले पंचायतीराज संस्थाओं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद) के चुनाव पर प्रदेश सरकार को करीब 25 करोड़ रुपये का खर्च वहन करना पड़ेगा। राज्य निर्वाचन आयोग ने इस खर्च का आकलन पूरा कर लिया है। पंचायतीराज चुनाव का पूरा व्यय राज्य सरकार ही उठाती है, केंद्र सरकार इसमें कोई हिस्सा नहीं देती।
कहां-कहां खर्च होगी राशि?
- कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटी
- सरकारी मशीनरी का उपयोग
- बैलेट पेपर व अन्य सामग्री की छपाई
- ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों का टीए-डीए, भोजन व ठहरने का इंतजाम
सबसे अधिक ड्यूटी शिक्षा विभाग के शिक्षकों व कर्मचारियों की लगती है, क्योंकि अधिकांश पोलिंग बूथ स्कूल भवनों में ही बनते हैं। इसके बाद पुलिस और होमगार्ड के जवानों की ड्यूटी लगाई जाती है। चुनाव संपन्न होने तक सभी कर्मचारी आयोग के अधीन डेपुटेशन पर रहते हैं और नतीजे घोषित होने के बाद अपने मूल विभागों में लौटते हैं।
चुनावी तैयारियां पूरी, सिर्फ रोस्टर का इंतजार
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार पंचायतीराज संस्थाओं का पांच साल का कार्यकाल खत्म होने के चार महीने पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। इस बार भी सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं।
- मतदाता सूचियां अंतिम रूप से तैयार
- बैलेट पेपर छप चुके हैं
- केवल रोस्टर (चुनाव कर्मियों की सूची) जारी होने का इंतजार
आचार संहिता की धारा 12.1 लागू, पंचायत सीमाओं में बदलाव पर रोक
17 नवंबर को राज्य निर्वाचन आयोग ने अधिसूचना जारी कर आदर्श आचार संहिता की धारा 12.1 लागू कर दी थी। इसके तहत चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक किसी भी पंचायत या वार्ड की सीमा, संरचना या वर्गीकरण में कोई बदलाव नहीं किया जा सकता।
पंचायतीराज विभाग ने इस धारा को हटाने का आग्रह किया था और तर्क दिया था कि पंचायतों की सीमा निर्धारण का अधिकार राज्य सरकार को है। लेकिन आयोग ने स्पष्ट किया है कि बैलेट पेपर छपने और मतदाता सूचियां फाइनल होने के बाद अब परिवर्तन से चुनाव टल सकते हैं। इसलिए धारा 12.1 को नियमों के तहत ही लागू किया गया है और विभाग को लिखित में विस्तृत जवाब दिया जाएगा।
आयोग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “चुनावी प्रक्रिया अंतिम चरण में है। अब किसी तरह का पुनर्गठन चुनाव कार्यक्रम को प्रभावित करेगा। इसलिए नियमों का पालन करते हुए आचार संहिता लागू रखी गई है।”
राज्य निर्वाचन आयोग अब केवल रोस्टर जारी होने का इंतजार कर रहा है, जिसके बाद चुनाव तिथियों की घोषणा कभी भी हो सकती है।
