पालमपुर – 18 नबम्बर, 2023- पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केन्द्रीय मंत्री शांता कुमार ने कहा है कि पालमपुर नगर निगम और कांग्रेस विधायक श्री अषीश बुटेल जी के निमन्त्रण पर मैंने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री श्री जवाहर लाल नेहरू जी की प्रतिमा का अनावरण किया। बहुत प्रतिक्रिया हुई, कुछ लोगों ने प्रषंसा की। परन्तु कुछ मित्र नाराज हो गये। एक अखवार ने लिखा कि भाजपा की नीति से हट कर मैंने ऐसा किया। सोषल मीडिया पर चर्चा हुई। एक वीडियो में तो यहां तक कहा कि षान्ता कुमार को अब कांग्रेस में षामिल हो जाना चाहिए। इन सब प्रतिक्रियाओं से हैरानी भी हुई और दुख भी हुआ।
उन्होंने कहा मैं 1952 से भारतीय जन संघ फिर जनता पार्टी और अब भारतीय जनता पार्टी से जुड़ हुआ हूं। मैंने जो कुछ नही भी किया वह पार्टी के सिद्धान्तों के अनुसार किया। भाजपा ने जब समाजवाद को अपनाया तो उसे गांधीवादी समाजवाद कहा, अलोचना हुई तो पार्टी ने कहा कि महात्मा गांधी देष के महान नेता थे। भाजपा उनका भी और उनके विचारों का भी सम्मान करती है।
षान्ता कुमार ने कहा कि जब श्री अटल जी प्रधानमंत्री बने तो पहले ही दिन कार्यालय को जाने लगे तो रास्ते के बरामदे में पण्डित नेहरू का एक चित्र लगा था। वे कई बार उसे देख चुके थे परन्तु उनके प्रधानमंत्री बनने पर उस चित्र को हटा दिया गया था। श्री अटल जी कार्यालय में गये और चित्र उतारने वाले व्यक्ति के विरूद्ध कार्यवाही हुई और उसी समय उस चित्र को उसी स्थान पर लगाया गया।
उन्होंने कहा कि श्री नरसिम्हा रॉव कांग्रेस के प्रधानमंत्री थे। पाकिस्तान से काष्मीर समस्या पर भयंकर संघर्श चल रहा था। उसी सम्बंध में राश्ट्र संघ में महत्वपूर्ण चर्चा होनी थी। उसके लिए जो संसदीय षिश्ट मण्डल भेजा गया उसके अध्यक्ष कोई कांग्रेस का नेता नही बल्कि श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी को बनाया। उन्होंने राश्ट्र संघ में पूरे भारत का पक्ष रखा। वापिसी पर उन्हें पूछ गया तो उन्होंने कहा काष्मीर समस्या पर बहुत से मतभेद है परन्तु राश्ट्र संघ में मतभेदों से ऊपर उठ कर मैंने एक भारत का पक्ष रखा।
षान्ता कुमार ने कहा 1962 के चीनी आक्रमण के बाद पण्डित नेहरू जी ने 26 जनवरी के कार्यक्रम में राश्ट्रीय स्वंय संघ सेवक को आमंत्रित किया था। भाजपा सभी राश्ट्रीय नेताओं के प्रति सम्मान का भाव रखती है। नीतिओं में मतभेद होने के कारण सम्मान में कमी नही होनी चाहिए। पण्डित नेहरू जी को बहुत सी नीतिओं के साथ मेरा मतभेद रहा है। आज भी है परन्तु भारत की आजादी के लिए बलिदान देने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री के प्रति मेरे मन में पूरा सम्मान है।
उन्होंने कहा श्री नेहरू जी 1942 में पालमपुर आये थे। उसी याद में पालमपुर चौंक में उनकी प्रतिमा लगी थी वह खराब हो गई थी। मैंने उसे देखा तो मैं बहुत आहत हुआ। मैंने एस. डी. एम., पालमपुर को पत्र लिखा और एक लाख रू0 चैंक भेजा और कहा कि देष के उस महान नेता की खण्डित प्रतिमा को षीघ्र बदला जाए। मतभेद होने का मतलब यह नही होता कि किसी महा पुरूश की प्रतिमा का सम्मान न किया जाए।
षान्ता कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री रहते हुए भी मैं केन्द्र की कांग्रेस सरकार के सभी नेताओं का सम्मान करता था। यही कारण था कि 1990 में कांग्रेस के प्रधानमंत्री श्री नरसिम्हा रॉव जी से मैं भाजपा का मुख्यमंत्री होते हुए भी हिमाचल प्रदेष के लिए पन बिजली योजनाओं के लिए रॉल्यटी का सिद्धान्त मनवाने का ऐतिहासिक निर्णय करवा सका। इस निर्णय के कारण आज करोड़ों रू0 प्रतिवर्श हिमाचल प्रदेष को मिलते है।
उन्होंने कहा राजनीति के अवमूल्यन का ही कारण है कि श्री नेहरू जी के प्रति सम्मान प्रकट करने के लिए मेरी अलोचना की जा रही है।
