मंडी: सराज विधानसभा क्षेत्र के आराध्य देव मगरू महादेव पवित्र स्नान करने बूढ़ा केदार पहुंचे. देव मगरू महादेव स्नान करते ही वस्त्र ओढ़कर अपने मूल स्थान छतरी पहुंच गए जहां झारी में लाए बूढ़ा केदार के जल से शिवलिंग का अभिषेक किया गया.
देवता की मूल पिंडी शिवलिंग के अभिषेक के उपरांत वस्त्र से ओढ़े घूंड (घूंघट) को हटाया गया. तदोपरांत मूल स्थान में विधि विधान की प्रक्रिया मुकम्मल होते ही देवता अपनी कोठी में विराजित हो गए.
बता दें कि देव मगरू महादेव निर्जला एकादशी गंगा दशहरा के पावन अवसर पर 33 साल बाद पवित्र स्नान के लिए रविवार सुबह को रवाना हुए जहां दिन भर करीब 35 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर शाम को बूढ़ा केदार पहुंचे.
देवता के आदेश सोमवार के दिन ही स्नान करने के थे जहां देव मगरू महादेव ने सुबह सात बजकर पांच मिनट पर स्नान किया. देवता की इस यात्रा में शामिल गुर, पुजारी, कठयाला, बजंत्री, देवलु और अन्य सैकड़ों हरियानों ने बूढ़ा केदार धार्मिक स्थल में स्नान किया और दैवीय स्वरूप प्रक्रिया के साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त किया.
देवता के गुर गंगा राम और हीरा लाल ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि शिव रूपी अवतार में भगवान शिव का बूढ़ा केदार को उच्च स्थान माना गया है. देव मगरू महादेव को भी शिव अवतार का अंश माना गया है लेकिन जब भी देव समाज में शुभ प्रक्रिया का आगाज होता है तो देवलुओं को भी उसी संस्कृति में रहकर कार्य करने होते हैं. जैसे ही देवता पवित्र स्नान के लिए बूढ़ा केदार को रवाना हुए थे तो वह उस समय सभी भक्तों को दर्शन देते हुए ही प्रवास पर निकले.
पवित्र स्नान कर लिया गया देवता वस्त्र से ढके हुए ही अपने आवास स्थान पहुंचे. इस दौरान जैसे ही देवता का काफिला वापस आने के लिए रवाना हुआ. उस वक्त देवता और देवलु न तो कहीं आराम करते हैं और न ही देवता और देवलु जमीन पर विराजित होते हैं. देवता की आज्ञानुसार देव मगरू महादेव का पवित्र स्नान प्रवास पूरी तरह से सफल रहा.
वादे मुताबिक देर शाम को समूचे क्षेत्र में जमकर बारिश हो गई. देवलुओं की मानें तो महादेव ने कुछ दिनों पहले ही बूढ़े केदार में शाही स्नान किया था जिसके बाद बारिश होने की बात कही थी. सोमवार को भी ऐसा ही हुआ जैसे ही देवता शाही स्नान के बाद अपने स्थान पर पहुंचे तो समूचे क्षेत्र में बारिश शुरू हो गई.
