हिमाचल में 90 हजार करोड़ कर्ज के बोझ के नीचे दबी प्रदेश सरकार ने आर्थिक सेहत सुधारने के लिए लोगों की जेब से पैसा निकालना शुरू कर दिया है. विधानसभा चुनाव से पहले जिस कांग्रेस में लोगों को 300 यूनिट फ्री बिजली देने की गारंटी दी थी. प्रदेश की सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में बनी उसी कांग्रेस की सरकार ने उपभोक्ताओं को महंगाई का करंट देना शुरू कर दिया है.
हिमाचल प्रदेश में एक के बाद एक बिजली सबसिडी में कटौती खत्म होनी शुरू हो गई है। पहले उद्योगों की सबसिडी पर कैंची चलाने के बाद अब सरकार ने उन घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की एडिशनल बिजली सबसिडी बंद कर दी है जो 300 यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करते हैं।
राज्य में ऐसे लगभग 93 हजार घरेलू बिजली उपभोक्ता हैं जो मासिक 300 यूनिट से ज्यादा बिजली का इस्तेमाल करते हैं। उनको सरकार 1 रूपए 03 पैसे प्रति यूनिट एडिशनल सबसिडी देती थी जो अब बंद कर दी गई है। इससे इन उपभोक्ताओं के लिए मासिक आधार पर 15 फीसदी बिजली महंगी हो जाएगी। इन घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की एडिशनल सबसिडी को खत्म करने के संबंध में बिजली बोर्ड ने नियामक आयोग को पत्र लिख दिया है और सरकार के फैसले से उसे अवगत करा दिया है। क्योंकि टैरिफ बिजली नियामक आयोग ही डिसाइड करता है। प्रदेश में घरेलू बिजली उपभोक्ताओं की बात करें तो साढ़े 18 लाख से ज्यादा उपभोक्ता हैं और कुल उपभोक्ताओं की बात करें तो यहां पर साढ़े 28 लाख उपभोक्ता हैं। जो फैसला बिजली बोर्ड ने लिया है वो उन घरेलू बिजली उपभोक्ताओं के लिए है जो 300 यूनिट से ज्यादा मासिक आधार पर बिजली का इस्तेमाल करते हैं।
15 फीसदी महंगी मिलेgi बिजली
उनको सरकार बिजली के बिल पर 300 यूनिट से ऊपर 1 रूपए 03 पैसे प्रति यूनिट की सबसिडी प्रदान करती है जिसे बंद कर दिया गया है। यानि अब इतनी बिजली मासिक इस्तेमाल करने वाले घरेलू बिजली उपभोक्ता को लगभग 15 फीसदी महंगी बिजली मिलेगी। करीब 300 से 500 रूपए तक मासिक बिजली में बढ़ोतरी हो जाएगी। राज्य में ऐसे 93 हजार के करीब उपभोक्ता हैं जिनका डाटा बिजली बोर्ड ने तैयार कर रखा है।
अभी लगता है प्रति यूनिट 5 रूपए 22 पैसे टैरिफ
ऐसे उपभोक्ताओं को बिजली का जो टैरिफ लगता है वो प्रति यूनिट 5 रूपए 22 पैसे है और अब उनका टैरिफ बढक़र 6 रूपए 25 पैसे हो जाएगा। इसी दर पर उनको बिजली के बिल आएंगे। अब अगर फिलहाल उनको सरकार की सबसिडी का फायदा लेना है तो उनको बिजली के इस्तेमाल को मासिक 300 यूनिट से कम करना होगा अन्यथा उनको 6 रूपए 25 पैसे प्रति यूनिट की दर से बिजली बिल चुकता करना होगा। सरकार ने 1 रूपए 03 पैसे प्रति यूनिट मिलने वाली एडिशनल सबसिडी को बंद कर दिया है और इस आदेश को पहली अक्टूबर से लागू किया जा रहा है।
यहां बताया जाता है कि नवम्बर महीने तक 300 यूनिट से नीचे के उपभोक्ताओं पर भी सबसिडी की मार पडऩे वाली है। इसे लेकर भी बिजली बोर्ड सरकार के निर्देशों पर काम कर रहा है। बताना यह भी जरूरी है कि बिजली सबसिडी से बिजली बोर्ड को कोई लाभ नहीं मिलता बल्कि सीधा सरकार को लाभ मिलता है। सरकार ही बोर्ड को सबसिडी का पैसा देती है और सरकार की आर्थिक हालत ठीक नहीं है लिहाजा इस सबसिडी को बंद करके वह एक बड़े आर्थिक बोझ से बचना चाहती है। इसके लिए अलग-अलग फैसले लिए जा रहे हैं और अब आने वाले दिनों में कम बिजली खर्चने वाले घरेलू उपभोक्ताओं पर भी मार पडऩे वाली है।
बिजली बोर्ड को कहा गया है कि वह समाज के सबसे नीचे के तबके को राहत दे और दूसरीे श्रेणियों को दी जा रही सरकारी सबसिडी को बंद करने के लिए योजना बनाए। बोर्ड ऐसे उपभोक्ताओं का डाटा बना रहा है और नवम्बर महीने से उनपर भी मार पडऩी शुरू हो जाएगी। फिर पूरा बोझ लगभग 14 से 15 लाख उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ेगा। इसके अलावा सरकार कमर्शियल व नॉन डोमेस्टिक नॉन कमर्शियल श्रेणियों में फैसला पहले ही ले चुकी है जिसकी सबसिडी में कटौती की गई है और इलैक्ट्रिसिटी डयूटी को कम किया गया है। उद्योगों की अलग-अलग श्रेणियों में इस तरह के लाभ अब बांट दिए गए हैं।
इन उपभोक्ताओं पर यह फैसला पहली अक्टूबर से लागू होगा। नियामक आयोग को इस संबंध में सूचित किया है जिसमें कहा गया है कि पहली अक्टूबर से नई दरों को प्रभारित किया जाएगा।
