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September 30, 2026
Kullu

Kullu: तहसीलदार को भीड़ ने कॉलर पकड़कर पीटा-खदेड़ा, जूतों का ‘पाप’ माफ कराने नाक रगड़ी ।

कुल्लू, हिमाचल प्रदेश – कुल्लू का प्रसिद्ध दशहरा उत्सव, जो देवताओं की भव्य सैर-सपाटे और सांस्कृतिक धूम के लिए जाना जाता है, इस बार एक ऐसे ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामे से शुरू हुआ, जो बॉलीवुड की किसी फिल्म से कम नहीं लगता। गुरुवार को पहले ही दिन देवता भृगु ऋषि के अस्थाई शिविर में जगह को लेकर छोटा-सा विवाद इतना भड़क गया कि तहसीलदार हरि सिंह यादव को भीड़ ने न सिर्फ धक्के-मुक्के मारे, बल्कि उनके कपड़े भी फाड़ दिए। वीडियो वायरल हो चुका है – तहसीलदार साहब कॉलर पकड़े खदेड़े जा रहे हैं, फोन पर चिल्ला रहे हैं, लेकिन ‘कनेक्शन’ तोड़ दिया जाता है। और सबसे हैरानी की बात? इस पूरे तमाशे पर अब तक कोई FIR नहीं, पुलिस गायब, और प्रशासन ‘मौन व्रत’ पर।

कहानी की शुरुआत तो बिल्कुल साधारण लगती है। कुल्लू दशहरा में भृगु ऋषि देवता का शिविर लगा, साथ में चामुंडा माता का भी। जगह की कमी से मामूली झड़प हुई, तो तहसीलदार हरि सिंह यादव ‘समाधानकर्ता’ बनकर पहुंचे। लेकिन यहीं ‘ट्रेजेडी’ शुरू हो गई। देव परंपरा के मुताबिक शिविर में जूते-चप्पल उतारकर जाना शिष्टाचार है, पर तहसीलदार साहब जूतों के साथ ही अंदर घुस गए। बस, क्या था – देवता के ‘हारियान’ (साथी भक्त) भड़क पड़े। “धौंस क्यों दिखा रहे हो? अगले साल दशहरा में निमंत्रण ही नहीं देंगे!” – ऐसा चिल्लाते हुए भीड़ ने तहसीलदार को घसीटा, मारा-पीटा, और शिविर के बाहर तक खदेड़ दिया। ग्राम पंचायत रतोचा के उपप्रधान और देवता के कारकून रिंकु शाह ने बताया, “तहसीलदार ने देवलुओं को धमकाया। जूते पहनकर घुसना तो पाप है ही, पिछले साल भी ऐसा ही किया था – फिर हमें शुद्धिकरण करना पड़ा। देव समाज का अपमान बर्दाश्त नहीं।”

तहसीलदार साहब ने बीच में फोन निकालकर मदद मांगी, लेकिन धक्कामुक्की में बात बन न सकी। उनकी शर्ट अस्त-व्यस्त, चेहरा तनावग्रस्त – वीडियो में सब साफ दिख रहा है। लेकिन आश्चर्यजनक रूप से, उन्होंने पुलिस को कोई शिकायत ही नहीं दी। मामला ‘ठंडे बस्ते’ में, जैसे कोई ‘दिव्य समझौता’ हो गया हो।

इस बीच, राजनीति ने भी एंट्री मार ली। कुल्लू के बंजार से भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने तहसीलदार को आड़े हाथों लिया। “ये वही हरि सिंह यादव हैं, जिन्होंने 2023 में 18 देवी-देवताओं के तंबू उखाड़ फेंके थे। बीते दो साल से देव समाज और लोगों का अपमान कर रहे हैं। कांग्रेस सरकार ने ऐसे अफसर को कुल्लू क्यों तैनात किया?” शौरी ने विधानसभा में प्रिविलेज मोशन भी दाखिल किया है, और कार्रवाई चल रही है। उन्होंने बताया कि आज तहसीलदार को देवता के सामने माफी मांगनी पड़ी – एक तरह का ‘दिव्य समर्पण’।

लेकिन असली सवाल तो यहीं से शुरू होते हैं। दशहरा में 1200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं, फिर घटना के दौरान एक भी सिपाही नजर क्यों नहीं आया? भीड़ ने कानून अपने हाथ में ले लिया, अधिकारी को पीटा, कपड़े फाड़े – तो लोगों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं? क्या देव परंपरा के नाम पर ‘अनरचित’ न्याय चलेगा? कुल्लू में कानून-व्यवस्था पर सवालों का सैलाब उमड़ पड़ा है। स्थानीय लोग कहते हैं, “देवता का अपमान तो बर्दाश्त नहीं, लेकिन प्रशासन का ‘अपमान’ भी तो कुछ कहता है।”

फिलहाल, उत्सव जारी है – देवताओं की सवारी चलेगी, नाच-गाना होगा। लेकिन ये वाकया एक सबक छोड़ गया: परंपरा और प्रशासन के बीच का ‘तनाव’ कभी-कभी ‘तहसीलदार’ से ज्यादा ‘दिव्य’ हो जाता है। पुलिस की प्रतिक्रिया का इंतजार, और उम्मीद है कि अगली बार जूते उतारने की ‘ट्रेनिंग’ तो दी जाएगी। कुल्लू दशहरा की धूम में ये ‘पिटाई एपिसोड’ एक काला अध्याय बन गया – या शायद, एक ‘शुद्धिकरण’ का मौका?

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