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September 6, 2026
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जान बचाने के लिए शुक्रिया! जिंदगी रही तो फिर लौट के आऊंगी।

बैजनाथ,19 सितंबर :

इंसान ने प्रकृति से खिलवाड़ की बेशक सारी हदें पार कर दी हों लेकिन जानवरों की उम्मीद अब भी इंसान ही है। उनकी भाषा, दयालुता,करूणा और मानवता से शायद जानवर भी बखूबी वाकिफ होते हैं, इसलिए जब कभी भी उनकी की जान पर बन आती है तो वे इंसान की आगोश को सुरक्षित पनाहगाह समझते हुए उनके यहां बेझिझक पनाह ले लेते हैं। मामला धर्मशाला के खनियारा का बताया जा रहा है, जब एक बार्किंग डीयर प्रजाति की मादा हिरण जंगल से रास्ता भटककर शहरी क्षेत्र में आ गई तो उसके पीछे कुछ कुत्ते पड़ गए। कुत्ते उसे नोचने लगे। तब वह मादा हिरण वहां स्थित जेके होटल के अंदर चली आई। वहां खड़े लोगों से बिना घबराए वह कमरे के अंदर घुसकर कोने में दुबक कर बैठ गई। होटल कर्मचारियों ने जब उसे घायल अवस्था में देखा तो पशु प्रेम से जुड़ी क्रांति संस्था के अध्यक्ष धीरज महाजन को इसकी सूचना दी। धीरज महाजन ने बिना देरी किए इसकी सूचना डिप्टी रेंजर सुनील कपूर और फॉरेस्ट गार्ड अजय भाटिया को दी। पशु चिकित्सकों की सलाह के अनुरूप प्रारंभिक उपचार के बाद उसे इंद्रनाग के जंगल में छोड़ दिया गया। बार्किंग डीयर प्रजाति की मादा हिरण की मौत ज्यादातर सदमे से होती है इसलिए वन विभाग महकमे के कर्मचारियों ने जल्द उपचार कर उसे जंगल में छोड़ना बेहतर समझा। हैरानी की बात यह है कि जब उसे जंगल में छोड़ा गया तो काफी देर तक उसकी जान बचाने वाले उन तमाम फरिश्तों को निहारती रही मानो कह रही हो मेहमान नवाजी के लिए शुक्रिया मैं फिर आऊंगी।

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