कुल्लू: देशभर में भगवान शिव के कई ऐसे मंदिर हैं. जहां पर वह शिवलिंग के रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं और अपने भक्तों की मनोकामनाओं को भी पूरा करते हैं, लेकिन हिमालय क्षेत्र में एक ऐसा भी मंदिर है जहां पर भगवान शिवलिंग के रूप में नहीं, बल्कि मूर्ति रूप में भक्तों को दर्शन देते हैं. इतना ही नहीं यह पूरी मूर्ति एक ही पत्थर से बनाई गई है और इसी मूर्ति में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश, भगवान कार्तिक और नंदी पर सवार हैं. ये मंदिर हिमाचल प्रदेश के जिला कुल्लू की पुरातन राजधानी नग्गर में स्थित है और इसे गौरीशंकर मंदिर के नाम से जाना जाता है.
जिला कुल्लू की प्राचीन राजधानी नग्गर में गौरीशंकर महादेव का मंदिर करीब दसवीं शताब्दी में बना हुआ है और ये पूरी तरह से पांडु शैली से निर्मित है. इस मंदिर की प्राचीनता को देखते हुए भारतीय पुरातत्व विभाग ने इसे अपने संरक्षण में लिया है. अंग्रेजी हुकूमत के दौरान भी साल 1912 में इसे नेशनल हेरिटेज में शामिल किया था. ऐसे में इस मंदिर के दर्शनों के लिए स्थानीय लोगों के साथ-साथ सैलानियों की भीड़ उमड़ती है. ये एक ऐसा मंदिर है जहां एक ही शिला पर पूरे शिव परिवार की प्रतिमा बनाई गई हैं. ये अपने आप में अद्भुत है और ये ही इसकी सबसे बड़ी खासितयत है.
राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक है ये मंदिर
त्रिअंग योजना में निर्मित इस मन्दिर के वगीकार गर्भगृह में गौरी-शंकर की सुन्दर प्रतिमा प्रतिष्ठित है. इस मन्दिर की पूर्व, उतर व दक्षिणी दीवारों में आले बनें है. दीवारें नर्तकों, संगीतज्ञों, पक्षियों और पूर्णकुम्भ आदि अलंकरणों से सुसज्जित है. आमलक से सुशोभित वक्ररेखीय शिखर में चैत्य खिड़कियों और किनारों पर भूमि आमलकों का अलंकरण है. मंडप मे दो वर्गाकार आधार वाले स्तम्भ हैं. कला व स्थापत्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण ये मन्दिर ग्यारहवीं-बारहवीं शताब्दी से सम्बन्धित है. इस मन्दिर के विशिष्ट पुरातात्विक एवं कलात्मक महत्व के कारण भारत सरकार के प्राचीन संस्मारक तथा पुरातत्वीय स्थल और अवशेष अधिनियम 1958 की अधिसूचना के तहत इसे राष्ट्रीय महत्व का संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है
मंदिर की दीवारों पर की गई नक्काशी
मंदिर के कारदार डिंपी नेगी ने बताया कि, ‘इस मंदिर की पुरातत्व विभाग देख रेख करता है. मंदिर में पत्थर की दीवारों पर लगे शैवाल को भी विशेष प्रकार के पदार्थ से साफ किया जाता है. इस पदार्थ का उपयोग आगरा के ताजमहल की दीवारों को साफ करने में भी किया जाता है, ताकि मंदिर के दीवारों को किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचे. शिवरात्रि और सावन माह के अवसर पर यहां पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है. ये मंदिर अति प्राचीन हैं और आज भी इस मंदिर की प्राचीनता बनी हुई है. इस मंदिर के दर्शनों के लिए बाहरी राज्यों से सैलानियों के अलावा स्थानीय लोग भी काफी संख्या में आते हैं. ये मंदिर पूरे भारत का एकमात्र मंदिर है जहां पर एक ही शिला पर नंदी पर सवार भगवान शिव का पूरा परिवार विराजमान है.’
