हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में एक बार फिर किंग कोबरा की साइटिंग ने ग्रामीणों को दहशत में डाल दिया। यह मामला उपमंडल पांवटा साहिब के व्यास गांव में सामने आया, जहां एक विशालकाय किंग कोबरा दिखाई दिया। स्थानीय निवासी पंकज कुमार ने वन विभाग को सूचना दी, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाकर सांप को सुरक्षित रेस्क्यू किया और उसे जंगल में छोड़ दिया।
क्या है पूरा मामला?
व्यास गांव में एक-दो दिनों से किंग कोबरा दिखाई दे रहा था, जिससे ग्रामीण दहशत में आ गए। स्थानीय निवासी पंकज कुमार ने वन विभाग को इसकी सूचना दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम ने रेंजर सुरेंद्र शर्मा, वन रक्षक वीरेंद्र शर्मा और विंकेश चौहान के नेतृत्व में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद टीम ने करीब 10 फीट लंबे किंग कोबरा को सुरक्षित रेस्क्यू किया। इसके बाद उसे जंगल में ले जाकर प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया, ताकि वह आबादी से दूर सुरक्षित रह सके।
किंग कोबरा क्यों है खास?
किंग कोबरा दुनिया के सबसे जहरीले और खतरनाक सांपों में से एक है। यह एशिया में पाया जाने वाला सबसे बड़ा विषैला सांप है, जिसकी लंबाई 13 फीट तक हो सकती है। इसका जहर इतना खतरनाक होता है कि यह अपने शिकार को पलक झपकते ही मौत की नींद सुला सकता है। किंग कोबरा मुख्य रूप से अन्य सांपों का शिकार करता है और इसके फन की पहचान इसके विशाल आकार से की जाती है।
वन विभाग ने ग्रामीणों से की अपील
वन विभाग के डीएफओ ऐश्वर्य राय ने बताया कि यह पहली बार है जब हिमाचल प्रदेश में किंग कोबरा को सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे जंगल में छोड़ा गया है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि यदि वे किसी जंगली जीव को देखें तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत वन विभाग को सूचित करें, ताकि उचित कदम उठाया जा सके।
हिमाचल में किंग कोबरा की पहली साइटिंग
किंग कोबरा की हिमाचल प्रदेश में पहली बार मौजूदगी कुछ साल पहले कोलर के नजदीक फांदी गांव में देखी गई थी। उस समय प्रवीण ठाकुर ने इस सांप को नेशनल हाईवे पर देखा था। इसके बाद दो-तीन बार इस सांप को साल के जंगलों में देखा गया था।
किंग कोबरा का प्राकृतिक आवास
किंग कोबरा आमतौर पर घने जंगलों और नम इलाकों में पाया जाता है। यह सांप मुख्य रूप से भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और चीन के कुछ हिस्सों में पाया जाता है। इसकी उपस्थिति इकोसिस्टम के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह अन्य सांपों की आबादी को नियंत्रित रखता है।
इस घटना ने एक बार फिर जंगली जीवों और मानव आबादी के बीच सह-अस्तित्व की चुनौतियों को उजागर किया है। वन विभाग ने ग्रामीणों से सतर्क रहने और जंगली जीवों को नुकसान पहुंचाए बिना उन्हें सुरक्षित रूप से बचाने की अपील की है।
