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March 27, 2026
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पांवटा साहिब में SDM के ‘चीमा कीमा’ वाले बयान पर बवाल, सिख समुदाय में रोष; पूर्व सीएम जयराम ठाकुर से माफी की उठी मांग

पांवटा साहिब, 18 जून 2025: हिमाचल प्रदेश के पांवटा साहिब में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की जनसभा के दौरान “चीमा कीमा नहीं चलेंगे” जैसे नारों ने सिख समुदाय के बीच तीव्र आक्रोश पैदा कर दिया है। यह नारा कथित तौर पर पांवटा साहिब के एसडीएम गुंजित सिंह चीमा के खिलाफ लगाया गया था, लेकिन सिख समुदाय ने इसे अपनी पहचान और सम्मान पर हमला मानते हुए कड़ा विरोध दर्ज किया है। समुदाय ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और भाजपा कार्यकर्ताओं से दो दिनों के भीतर सार्वजनिक माफी मांगने की मांग की है, अन्यथा कड़े कदम उठाने की चेतावनी दी है।

घटना पांवटा साहिब के रामलीला मैदान में आयोजित भाजपा की जनसभा और प्रदर्शन के दौरान हुई। सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने ऐतिहासिक गुरुद्वारा परिसर में एकत्र होकर इस नारेबाजी की निंदा की। समाजसेवी इंद्रजीत सिंह मिक्का, किसान नेता तरसेम सिंह, परमजीत सिंह बंगा, गुरजीत सिंह, जसविंदर सिंह बिलिंग और प्रदीप सिंह सैनी ने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि यह नारा सिख समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला है। उन्होंने बताया कि हाल ही में माजरा प्रकरण के दौरान भी एसडीएम द्वारा ड्यूटी के दौरान डंडा लिए जाने को खालिस्तान से जोड़कर सिख समुदाय को निशाना बनाया गया था।

प्रतिनिधियों ने कहा कि “चीमा” न केवल एक अधिकारी का नाम है, बल्कि सिख समुदाय की एक प्रतिष्ठित पहचान भी है। इस तरह की नारेबाजी से पूरे समुदाय का अपमान हुआ है। उन्होंने हाल के एक अन्य मामले का जिक्र करते हुए कहा कि बंगाल में सिख समुदाय की एक पुलिस अधीक्षक के साथ धक्का-मुक्की की घटना के बाद अब पांवटा साहिब में यह विवाद सिख समुदाय को और अधिक आहत कर रहा है।

सिख समुदाय ने मुख्यमंत्री, पुलिस और प्रशासन से मांग की है कि नारेबाजी करने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। समाजसेवी सरदार अनिद्र सिंह नॉटी ने भी इस घटना की निंदा करते हुए सरकार और पुलिस से त्वरित कार्रवाई की मांग की है।

नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि पांवटा साहिब में जो कुछ हो रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार के इशारे पर पुलिस और प्रशासन पीड़ित पक्ष को परेशान कर रहा है और आरोपियों का साथ दे रहा है।

सिख समुदाय ने स्पष्ट किया कि यदि दो दिनों के भीतर माफी नहीं मांगी गई, तो वे इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए मजबूर होंगे। यह विवाद न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश में तनाव का कारण बन सकता है, और प्रशासन से इसे गंभीरता से लेने की अपील की गई है।

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