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May 17, 2026
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“मेरठ सौरभ मर्डर केस: धारा 302 की जगह अब BNS की सेक्शन 103, क्या मुस्कान और साहिल को मिलेगी फांसी या उम्रकैद?”

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में सौरभ की पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उनके प्रेमी साहिल शुक्ला पर हत्या का आरोप है। आइए, इस केस में नए कानूनों के तहत कितनी सजा हो सकती है, इसे विस्तार से समझते हैं।

पहले समझें, क्या है पूरा मामला?

सौरभ राजपूत लंदन में एक बेकरी में काम करते थे और अपनी पत्नी मुस्कान और छह साल की बेटी के जन्मदिन के लिए 24 फरवरी 2025 को मेरठ लौटे थे। लेकिन सौरभ को क्या पता था कि उनकी पत्नी ने उनके प्रेमी साहिल शुक्ला के साथ मिलकर उनकी हत्या की साजिश रच रखी थी। 4 मार्च को मुस्कान ने सौरभ के खाने में नशीली दवा मिलाकर उन्हें बेहोश कर दिया। इसके बाद साहिल ने सौरभ को चाकू से गोदकर मार डाला। फिर दोनों ने शव को 15 टुकड़ों में काटा, एक नीले ड्रम में सीमेंट भरकर छिपा दिया। यह सनसनीखेज हत्याकांड तब सामने आया, जब मुस्कान ने अपनी मां को सारी बात बता दी और मां ने पुलिस को सूचना दे दी। दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया और 19 मार्च 2025 को मेरठ की अदालत ने उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

नए कानून के तहत सजा की संभावना

यह मामला भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 302 (हत्या) के तहत दर्ज किया गया है, लेकिन 2023 में भारत में आपराधिक कानूनों में बड़े बदलाव हुए हैं और अब भारतीय न्याय संहिता (BNS) लागू है, जो IPC की जगह ले चुकी है। इस नए कानून के तहत सजा की संभावनाओं को देखते हैं:

BNS धारा 103 (हत्या):

यह धारा हत्या के लिए सजा का प्रावधान देती है। इसमें दो मुख्य सजा का उल्लेख है:

  1. आजीवन कारावास (उम्रकैद): इस केस की क्रूरता को देखते हुए, मुस्कान और साहिल को आजीवन कारावास की सजा मिलना लगभग तय माना जा रहा है। इसका मतलब है कि वे अपनी पूरी जिंदगी जेल में बिताएंगे और BNS में ‘आजीवन कारावास’ को सख्ती से ‘जिंदगी भर जेल’ के रूप में परिभाषित किया गया है, जिसमें पैरोल की संभावना भी सीमित हो सकती है।
  2. मृत्युदंड (फांसी): BNS के तहत, अगर अपराध ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में आता है। यानी अपराध इतना जघन्य हो कि समाज के लिए एक खतरनाक मिसाल बन जाए तो फांसी की सजा दी जा सकती है। इस केस में कई बातें इसे ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ बनाती हैं।
  • सुनियोजित साजिश: मुस्कान ने नवंबर 2024 से हत्या की योजना बनानी शुरू कर दी थी। उसने नशीली दवाएं, चाकू, और ड्रम पहले से खरीदे थे।
  • क्रूरता: सौरभ को नशीली दवा देकर बेहोश करने के बाद चाकू से गोदना, फिर शव को 15 टुकड़ों में काटना और सीमेंट में छिपाना यह सब अपराध की क्रूरता को दर्शाता है।
  • सामाजिक प्रभाव: सौरभ की छह साल की बेटी ने पड़ोसियों को बताया, ‘पापा ड्रम में हैं’, जिससे लगता है कि बच्ची ने कुछ देखा होगा। यह बात इस मामले को और गंभीर बनाती है।

BNS धारा 105 (सुनियोजित हत्या):

यह धारा खास तौर पर उन हत्याओं के लिए है, जो पहले से सोच-समझकर की गई हों। इस केस में मुस्कान और साहिल ने हत्या की पूरी प्लानिंग की थी दवाओं से लेकर हथियार तक का इंतजाम पहले से कर लिया गया था। इस धारा के तहत भी सजा उम्रकैद या फाँसी हो सकती है।

क्या कहते हैं कानूनी विशेषज्ञ?

दिल्ली के वकील अशोक यादव के अनुसार, इस केस में चार्जशीट दाखिल होने और जांच पूरी होने में कम से कम 90 दिन लग सकते हैं। इस दौरान दोनों को जमानत मिलने की संभावना न के बराबर है। BNS के तहत ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ केस की परिभाषा को कोर्ट सख्ती से देखती है और यहां अपराध की क्रूरता, साजिश, और सामाजिक प्रभाव को देखते हुए फांसी की सजा की मांग मजबूत हो सकती है। डीआईजी मेरठ रेंज कलानिधि नैथानी ने भी इस अपराध को ‘अत्यंत जघन्य’ करार दिया है और पुलिस कठोर सजा के लिए मजबूत पैरवी करने की तैयारी में है।

क्राइम का तरीका

  • साजिश और अंधविश्वास का खेल: मुस्कान ने साहिल को स्नैपचैट पर फर्जी मैसेज भेजकर यह विश्वास दिलाया कि उसकी मृत माँ उससे सौरभ को मारने के लिए कह रही है। साहिल अंधविश्वासी था और उसके कमरे में तंत्र-मंत्र से जुड़ी तस्वीरें भी मिलीं। यह साजिश अपराध को और गंभीर बनाती है।
  • पश्चाताप का अभाव: जेल में मुस्कान की पहली रात बेचैनी में बीती। उसने खाना नहीं खाया और रातभर रोती रही, लेकिन उसने किसी से बात नहीं की। दोनों ने जेल में एक-दूसरे के पास बैरक की माँग की थी, जो खारिज कर दी गई। इससे लगता है कि उन्हें अपने किए पर ज्यादा पछतावा नहीं है।
  • सामाजिक आक्रोश: सौरभ के परिवार और मुस्कान के माता-पिता ने फांसी की मांग की है। सोशल मीडिया पर लोग इस मामले को लेकर गुस्से में हैं और कठोर सजा की माँग कर रहे हैं। यह कोर्ट पर दबाव डाल सकता है।

अन्य धाराएं:

  • BNS धारा 238 (सबूत मिटाने की कोशिश): शव को टुकड़ों में काटकर ड्रम में सीमेंट भरना सबूत मिटाने की कोशिश है। इसके लिए 7 साल तक की सजा और जुर्माना हो सकता है।
  • BNS धारा 61 (आपराधिक साजिश): दोनों ने मिलकर साजिश रची, जिसके लिए अलग से सजा (उम्रकैद तक) हो सकती है।

क्या कहता है इतिहास?

भारत में ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ मामलों में फांसी की सजा दी गई है, जैसे कि निर्भया केस (2012) और धनंजय चटर्जी केस (2004)। इस केस की क्रूरता और साजिश को देखते हुए कोर्ट इसे उसी श्रेणी में रख सकती है। हालांकि, BNS के तहत सजा का अंतिम फैसला सबूतों, गवाहों, और कानूनी दलीलों पर निर्भर करेगा।

मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को BNS धारा 103 और 105 के तहत आजीवन कारावास या फांसी की सजा हो सकती है। अपराध की क्रूरता और सुनियोजित साजिश को देखते हुए, यह मामला ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ श्रेणी में आ सकता है, जिसमें फांसी की सजा की संभावना बढ़ जाती है। अंतिम फैसला कोर्ट के हाथ में है, लेकिन सामाजिक आक्रोश और कानूनी विशेषज्ञों की राय को देखते हुए, इस केस में कठोर सजा की उम्मीद की जा सकती है।

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