शिमला के प्रतिष्ठित स्कूल का एक निर्णय विवादों के घेरे में आ गया है। स्कूल ने ईद के अवसर पर जूनियर वर्ग के छात्रों को सफेद कुर्ता-पायजामा और छोटी टोपी पहनकर आने के साथ-साथ सेवइयां और ड्राई फ्रूट्स लाने के निर्देश जारी किए थे। इस फैसले पर भाजपा, हिंदू संगठनों और स्थानीय लोगों ने कड़ा विरोध जताया है और इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। विरोधियों का कहना है कि स्कूल में पढ़ने वाले अधिकतर बच्चे हिंदू परिवारों से हैं और उन पर किसी विशेष धर्म के प्रतीकात्मक वस्त्र पहनने का दबाव बनाना अनुचित है।
देवभूमि क्षत्रिय संगठन सवर्ण मोर्चा के रुमित ठाकुर ने कहा, “बच्चों की शिक्षा का उद्देश्य समावेशिता और संस्कार विकसित करना होना चाहिए, न कि धार्मिक पहचान थोपना।” उन्होंने जिला प्रशासन से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। सोशल मीडिया पर भी इस निर्णय के खिलाफ तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, जहां लोग हिमाचल की संस्कृति और भविष्य को लेकर चिंता जता रहे हैं।
वहीं, स्कूल प्रशासन ने सफाई दी है कि यह निर्देश स्वैच्छिक है और किसी पर कोई दबाव नहीं डाला गया। प्रधानाचार्य रूबिन जॉन ने कहा, “हम होली, ईद, दिवाली जैसे त्योहारों को सांस्कृतिक सम्मान के रूप में मनाते हैं। भागीदारी बच्चों और अभिभावकों की मर्जी पर निर्भर है।” स्कूल ने सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रामक और सांप्रदायिक संदेशों को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए ऐसी पोस्ट हटाने की अपील की है।
भाजपा नेता संजय सूद ने इसे समाज में तनाव पैदा करने वाला कदम करार दिया और चेतावनी दी कि यदि स्कूल ने फैसला वापस नहीं लिया तो 28 मार्च को स्कूल के बाहर प्रदर्शन किया जाएगा। जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग तेज हो रही है, जबकि स्कूल ने एकता और सद्भाव बनाए रखने की अपील की है। यह मामला अब सोशल और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।
