शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने मोबाइल फोन और बैटरी चार्जर को अलग-अलग मानते हुए चार्जर पर 5% के बजाय 13.75% वैट लगाने का महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि मोबाइल चार्जर सेलफोन का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सहायक उपकरण है। इस फैसले के साथ कोर्ट ने हिमाचल कर न्यायाधिकरण, धर्मशाला के 9 जून 2022 के उस आदेश को खारिज कर दिया, जिसमें चार्जर पर 5% वैट निर्धारित किया गया था।
खंडपीठ ने कहा कि कर न्यायाधिकरण ने हिमाचल प्रदेश वैट अधिनियम 2005 की अनुसूची-ए के प्रावधानों की अनदेखी की। इस अनुसूची में मोबाइल चार्जर और अन्य सहायक उपकरण शामिल नहीं हैं। कोर्ट ने माना कि चार्जर एक स्वतंत्र उपकरण है, जिसे सेलफोन के बिना भी बेचा जा सकता है। इसलिए इसे सेलफोन का हिस्सा मानकर कम दर पर वैट लगाना गलत है।
राज्य सरकार की ओर से दायर सिविल पुनरीक्षण याचिका को स्वीकार करते हुए कोर्ट ने सरकार की दलीलों को सही ठहराया। महाधिवक्ता अनूप रतन ने तर्क दिया कि कर न्यायाधिकरण ने वैट अधिनियम की दरों को नजरअंदाज किया और सुप्रीम कोर्ट के नोकिया इंडिया मामले के फैसले की गलत व्याख्या की। उन्होंने कहा कि चार्जर पर 13.75% वैट लागू होना चाहिए।
माइक्रोमैक्स की दलीलें खारिज
माइक्रोमैक्स इन्फॉरमेटिक्स लिमिटेड ने दावा किया था कि सेलफोन के साथ बेचे जाने वाले चार्जर पर 5% वैट ही लागू होना चाहिए, क्योंकि सरकार के 30 नवंबर 2015 के ज्ञापन में चार्जर को सेलफोन के साथ बंडल मानने की बात कही गई थी। हालांकि, कोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।
राजस्व में होगी बढ़ोतरी
अतिरिक्त महाधिवक्ता सुशांत कपरेट ने इस फैसले को ऐतिहासिक बताया और कहा कि इससे राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी। यह मामला वित्तीय वर्ष 2013-14 और 2014-15 के कर निर्धारण से संबंधित था, जिसमें माइक्रोमैक्स पर 1 अप्रैल 2014 से 31 मार्च 2016 तक ब्याज सहित 24,52,973 रुपये का अतिरिक्त वैट लगाया गया था।
हाईकोर्ट के इस फैसले से मोबाइल चार्जर जैसे सहायक उपकरणों पर कराधान के नियम स्पष्ट हो गए हैं, जिसका असर भविष्य में कर निर्धारण पर भी पड़ेगा।
