हमीरपुर : हिमाचल प्रदेश के जिला हमीरपुर में नशे की लत ने एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर दिया। जिला मुख्यालय में एक महिला ने अपने बेटे के चिट्टा तस्करी के आरोप में जेल जाने के गम में दम तोड़ दिया। मृतक महिला का पति नशे में इस कदर बेसुध था कि वह श्मशानघाट तक नहीं पहुंच सका। यह दिल दहलाने वाली घटना नशे की बर्बादी की भयावह तस्वीर पेश करती है।
जानकारी के अनुसार, मृतक महिला का बेटा चिट्टा तस्करी के मामले में जेल में बंद है। शनिवार सुबह महिला ने घर में ही अंतिम सांस ली। घर में मौजूद 85 वर्षीय बुजुर्ग सास ने पड़ोसियों और रिश्तेदारों को इसकी सूचना दी। रिश्तेदारों ने बेटे को जेल से छह घंटे की रिहाई दिलवाकर श्मशानघाट लाया, जहां उसने मां को मुखाग्नि दी। हालांकि, अंडर ट्रायल होने के कारण उसे पैरोल नहीं मिल सका, क्योंकि रिहाई के लिए गारंटर की जरूरत थी, जो उपलब्ध नहीं हुआ। हैरानी की बात है कि मृतक महिला के पति ने भी गारंटर बनने से इनकार कर दिया, क्योंकि इसके लिए संपत्ति का रिकॉर्ड कानूनी प्रक्रिया में देना जरूरी था।
मां के बैंक खातों का हुआ था दुरुपयोग
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी बेटे ने अपनी मां के बैंक खातों का इस्तेमाल चिट्टा तस्करी के लेनदेन के लिए किया था, जिससे मां अनजान थी। एक साल पहले ऊना में चिट्टा तस्करी के मामले में बेटे के खिलाफ केस दर्ज हुआ था। इसके बाद मां उसे नशे की दलदल से निकालने की कोशिश में जुटी थी, लेकिन हाल ही में हमीरपुर में भारी मात्रा में चिट्टे के साथ बेटे को घर से गिरफ्तार किया गया। इस सदमे ने मां को तोड़ दिया और वह काल का ग्रास बन गई।
नशे के खिलाफ सामूहिक प्रयास जरूरी
एसपी हमीरपुर भगत सिंह ठाकुर ने इस दुखद घटना पर कहा, “नशे की कुरीति को खत्म करने के लिए सामूहिक प्रयासों की जरूरत है। अंडर ट्रायल कैदियों को कोर्ट के माध्यम से रिहाई दी जाती है, लेकिन इसके लिए कानूनी प्रक्रिया का पालन जरूरी है।” उन्होंने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नशे के खिलाफ जागरूकता और सख्त कार्रवाई पर जोर दिया।
यह घटना न केवल एक परिवार की त्रासदी को दर्शाती है, बल्कि समाज में नशे की बढ़ती समस्या के खिलाफ कड़े कदम उठाने की आवश्यकता को भी रेखांकित करती है।
