हिमाचल प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन (एचपीपीसीएल) के चीफ इंजीनियर विमल नेगी की रहस्यमयी मौत की जांच में नया मोड़ आया है। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सौंप दी है। पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) डॉ. अतुल वर्मा द्वारा हाईकोर्ट में दायर हलफनामे ने शिमला पुलिस की जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, जो इस मामले को सीबीआई को सौंपने का मुख्य आधार बना।
डीजीपी ने अपने हलफनामे में खुलासा किया कि विमल नेगी के शव के साथ मिली पेन ड्राइव को शिमला पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) के एक अधिकारी, एएसआई पंकज शर्मा ने छिपाया और उसे फॉर्मेट कर दिया। इस पेन ड्राइव को 18 मार्च को गोविंदसागर झील में विमल नेगी का शव बरामद होने के दौरान एक मछुआरे ने उनकी जेब से निकाला था, जिसकी वीडियो भी बनाई गई थी। हालांकि, तलाई पुलिस स्टेशन की टीम से इस पेन ड्राइव की जानकारी छिपाई गई, जबकि शव के साथ मिले आईकार्ड, कैश और पर्स को बरामदगी में दिखाया गया।
डीजीपी ने उठाए ये सवाल
डीजीपी ने अपने हलफनामे में कई सवाल उठाए:
• पेन ड्राइव को क्यों और किसके कहने पर फॉर्मेट किया गया?
• पेन ड्राइव के बारे में कितने लोगों को जानकारी थी?
• एएसआई पंकज शर्मा शव की तलाशी के दौरान फोन पर किससे बात कर रहे थे?
• फॉर्मेट की गई पेन ड्राइव से फोरेंसिक उपकरणों की मदद से कुछ दस्तावेज रिकवर किए गए, लेकिन कुछ दस्तावेज खराब क्यों हो गए?
• 20 मार्च की एक चैट में पांच पुलिस कर्मचारियों के बीच पेन ड्राइव की हैश वेल्यू, यूनिक नंबर और इसे बदलने की बातचीत क्यों हुई?
डीजीपी ने बताया कि 15 मार्च को विमल नेगी को तलाशने के लिए एसआईटी गठित की गई थी, जिसमें डीएसपी अमित कुमार को प्रमुख बनाया गया। इसमें एसएचओ सदर थाना शिमला धर्मसेन नेगी, एसएचओ घुमारवीं अमिता देवी और आईओ यशपाल शामिल थे। अतिरिक्त महानिदेशक ज्ञानेश्वर सिंह को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन 14 मार्च को बिना लिखित आदेश के एएसआई पंकज शर्मा और आरक्षी विपिन चंडीगढ़ रवाना हो गए थे। 19 मार्च को एफआईआर दर्ज होने के बाद भी जांच में कई खामियां सामने आईं।
एसीएस की रिपोर्ट में मानसिक प्रताड़ना का खुलासा
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) ओंकार शर्मा की 66 पन्नों की जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि पावर कॉर्पोरेशन के निलंबित निदेशक देशराज कर्मचारियों और अधिकारियों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करते थे। कर्मचारियों को देर रात तक कार्यालय में रोककर काम करने का दबाव बनाया जाता था। यदि कोई सवाल उठाता, तो उसे चार्जशीट की धमकी दी जाती थी। विमल नेगी, जो देशराज के साथ एनआईटी हमीरपुर में पढ़े थे और उनसे सीनियर थे, को बार-बार फाइलों के साथ बुलाकर घंटों खड़ा रखा जाता था। कई कर्मचारियों ने मानसिक तनाव की दवाइयां लेने की बात भी कही।
पेन ड्राइव का खुलासा मछुआरे की वीडियो से
पेन ड्राइव के छिपाए जाने का राज एक मछुआरे के मोबाइल से बनी वीडियो और फोटोग्राफ से खुला। इस वीडियो में एएसआई पंकज को पेन ड्राइव मिलने की बात कहते देखा गया। पुलिस ने मछुआरे का मोबाइल और दो अन्य मछुआरों के बयान भी दर्ज किए। डीजीपी ने यह भी बताया कि एसपी शिमला ने मामले का रिकॉर्ड देने से इनकार कर दिया, जिससे जांच की निष्पक्षता पर और सवाल उठे।
परिजनों की मांग और हाईकोर्ट का फैसला
विमल नेगी की पत्नी किरण नेगी ने शिमला पुलिस की जांच पर भरोसा न होने की बात कहते हुए हाईकोर्ट में सीबीआई जांच की मांग की थी। परिजनों ने आरोप लगाया कि सरकार और पुलिस ने मामले को दबाने की कोशिश की। हाईकोर्ट ने 23 मई को जस्टिस अजय मोहन गोयल की बेंच में इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला सुनाया, जिसमें हिमाचल कैडर का कोई अधिकारी शामिल नहीं होगा। परिजनों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब सच्चाई सामने आएगी और उन्हें न्याय मिलेगा।
विपक्ष का सरकार पर हमला
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने भी सरकार पर मामले को दबाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पेन ड्राइव को फॉर्मेट करने और सबूतों से छेड़छाड़ के पीछे बड़े लोग शामिल हो सकते हैं। उन्होंने सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया।
विमल नेगी की मौत का रहस्य
विमल नेगी 10 मार्च को लापता हुए थे और 18 मार्च को उनका शव बिलासपुर के गोविंदसागर झील से बरामद हुआ था। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार उनकी मृत्यु 11 या 12 मार्च को हो चुकी थी। परिजनों ने इसे हत्या का मामला बताते हुए सीबीआई जांच की मांग की थी।
यह मामला अब सीबीआई के हवाले है, और उम्मीद है कि निष्पक्ष जांच से विमल नेगी की मौत की सच्चाई सामने आएगी।
