पांवटा साहिब, 20 जून 2025: हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले के पांवटा साहिब के माजरा थाना क्षेत्र में कथित लव जिहाद और एक नाबालिग युवती के अपहरण के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इस मामले में हुई हिंसा और उसके बाद के घटनाक्रम ने न केवल सामाजिक तनाव को बढ़ाया, बल्कि सिख समुदाय को भी आक्रोशित कर दिया है। सिख समुदाय ने पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल पर पांवटा साहिब के एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा के खिलाफ अपशब्दों का उपयोग करने का आरोप लगाया है।
यह विवाद 4 जून 2025 को शुरू हुआ, जब माजरा थाना क्षेत्र की एक पंचायत से एक नाबालिग हिंदू युवती के अपहरण का मामला सामने आया। परिजनों ने आरोप लगाया कि एक विशेष समुदाय के युवक ने युवती को भगाकर ले गया। इस मामले में 14 जून को पुलिस ने युवती को हरियाणा के अंबाला जिले के साहा से बरामद कर लिया, और संदिग्ध युवक को भी हिरासत में लिया। हालांकि, इस बीच हिंदूवादी संगठनों, पुलिस प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के बीच तनावपूर्ण टकराव देखने को मिला। 13 जून को माजरा चौक पर हुए प्रदर्शन के दौरान पथराव और झड़प में एक एएसआई समेत कई लोग घायल हो गए। पुलिस ने इस मामले में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, पांवटा साहिब के विधायक सुखराम चौधरी और अन्य के खिलाफ हत्या के प्रयास सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया।
इसके विरोध में 18 जून को भाजपा ने पांवटा साहिब में एक आक्रोश रैली का आयोजन किया, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप और अन्य भाजपा नेता शामिल हुए। रैली के दौरान एसडीएम गुंजीत सिंह चीमा के खिलाफ “चीमा-कीमा नहीं चलेंगे” जैसे नारे लगाए गए, जिसे सिख समुदाय ने अपने सम्मान पर हमला माना। सिख समुदाय के प्रतिनिधियों ने 19 जून को पांवटा साहिब के ऐतिहासिक गुरुद्वारा परिसर में एकत्र होकर पत्रकार वार्ता की और चेतावनी दी कि यदि दो दिनों के भीतर जयराम ठाकुर और भाजपा कार्यकर्ता सार्वजनिक रूप से माफी नहीं मांगते, तो वे सड़कों पर उतरेंगे।
सिख समुदाय की नाराजगी को देखते हुए जयराम ठाकुर और राजीव बिंदल ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सफाई दी। जयराम ठाकुर ने लिखा, “मैंने पांवटा साहिब में आयोजित जनसभा में किसी भी समुदाय विशेष के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की। मेरी गुरु गोविंद सिंह जी के प्रति अगाध श्रद्धा है और सिख धर्म के प्रति बहुत सम्मान है। किसी की भावना को आहत करने की मेरी कोई मंशा नहीं थी।” वहीं, राजीव बिंदल ने कहा, “मेरे व्यवहार से किसी सिख बंधु को ठेस पहुंची हो तो मैं खेद प्रकट करता हूं।”
इस मामले में पुलिस ने माजरा थाना क्षेत्र में भारतीय न्याय संहिता की धारा 163 लागू कर दी है, जिसके तहत पांच या अधिक लोगों के एकत्र होने पर प्रतिबंध है। साथ ही, पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया है।
हालांकि, यह मामला अभी भी तनावपूर्ण बना हुआ है। सिख समुदाय ने मांग की है कि नारेबाजी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों। दूसरी ओर, भाजपा नेताओं ने पुलिस और प्रशासन पर पक्षपातपूर्ण कार्रवाई का आरोप लगाया है और पीड़ित परिवार के साथ खड़े रहने की बात कही है।
इस पूरे प्रकरण ने पांवटा साहिब में सामाजिक और राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है, और प्रशासन के लिए स्थिति को शांत करना एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।
