बैजनाथ (हिमाचल प्रदेश) — विश्व प्रसिद्ध ऐतिहासिक शिव मंदिर बैजनाथ के लिए खतरे की घंटी बज चुकी है। मंदिर से सटी पहाड़ी का लगातार दरकना अब राष्ट्रीय उच्च मार्ग (एनएच) और मंदिर दोनों के लिए खतरे का संकेत बन गया है। इस पहाड़ी से कई वर्षों से बरसात के मौसम में पानी का रिसाव हो रहा है, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान आज तक नहीं किया गया।
एनएच के रेलवे फाटक से लेकर बस अड्डे तक दोनों ओर निकासी नालियों का अभाव है, जिससे बरसात का पानी सड़क पर बहता है और धीरे-धीरे पहाड़ी की जड़ें कमजोर हो गई हैं। नतीजतन, पहाड़ी धंसने लगी है और दरारें आ चुकी हैं।
हाल ही में आईआईटी मंडी के विशेषज्ञों ने क्षेत्र का निरीक्षण किया और प्रशासन को सुझाव दिए कि कैसे पहाड़ी को बचाकर शिव मंदिर को संभावित नुकसान से बचाया जा सकता है। लेकिन विशेषज्ञों की सलाह के बावजूद प्रशासन की ओर से अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
स्थानीय प्रशासन ने केवल एहतियात के तौर पर वाहनों के लिए बैरिकेड लगाकर डायवर्जन की व्यवस्था की है। हालांकि यह अस्थायी उपाय है, खतरा अभी टला नहीं है। साथ ही, पास की बिनवा नदी में अवैध खनन भी जारी है, जो इस क्षेत्र की स्थिरता को और अधिक खतरे में डाल रहा है। कई बार खीर गंगा घाट में नदी के तेज बहाव से क्षति भी हो चुकी है।
एसडीएम बैजनाथ संकल्प गौतम ने जानकारी दी कि वर्तमान में केवल एहतियाती कदम उठाए गए हैं और वाहन डायवर्ट किए जा रहे हैं। वहीं, राष्ट्रीय उच्च मार्ग विभाग का कहना है कि निकासी के लिए अस्थायी प्रबंध किए गए हैं और भविष्य में स्थायी नालियां बनाई जाएंगी।
स्थानीय लोग प्रशासन की लापरवाही से नाराज़ हैं और मांग कर रहे हैं कि जल्द से जल्द इस ऐतिहासिक धरोहर और महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
