25 और 26 अगस्त 2025 को हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले में हुई भारी बारिश ने मणिमहेश यात्रा मार्ग को बुरी तरह प्रभावित किया। मणिमहेश से हड़सर के बीच नाले में बाढ़ आने और चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन के कारण सड़कें और पुल ध्वस्त हो गए। इस आपदा के चलते हजारों श्रद्धालु भरमौर और कुगती में फंस गए। चंबा-भरमौर हाईवे के 22 किलोमीटर हिस्से पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया, जिससे सड़क मार्ग से निकासी असंभव हो गई।
वायुसेना ने संभाला मोर्चा
भारतीय वायुसेना ने फंसे श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालने के लिए एम-17 और चिनूक हेलीकॉप्टरों के साथ रेस्क्यू अभियान शुरू किया। शुक्रवार, 5 सितंबर 2025 को दो चिनूक हेलीकॉप्टरों ने 12 उड़ानें भरकर 524 श्रद्धालुओं और तीन शवों को भरमौर से करियां हेलीपैड होते हुए चंबा पहुंचाया। शनिवार, 6 सितंबर 2025 को अंतिम चरण के रेस्क्यू अभियान में एम-17 हेलीकॉप्टर के जरिए 23 श्रद्धालुओं को चंबा पहुंचाया गया। कुगती में फंसे शवों को भी निकालने का कार्य जारी है।
प्रशासन का दावा: आज सभी श्रद्धालु होंगे सुरक्षित
चंबा के उपायुक्त मुकेश रेप्सवाल ने बताया कि फंसे हुए सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकालना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। शनिवार सुबह से वायुसेना के हेलीकॉप्टरों के माध्यम से रेस्क्यू अभियान तेजी से चल रहा है। उन्होंने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि आज हर हाल में अंतिम चरण का अभियान पूरा कर सभी श्रद्धालुओं को चंबा पहुंचाया जाए। चंबा-भरमौर मार्ग पर भूस्खलन के कारण सड़क मार्ग से निकासी संभव नहीं है, इसलिए हेलीकॉप्टर ही एकमात्र विकल्प है।” प्रशासन ने मुफ्त भोजन, पानी और परिवहन की व्यवस्था भी की है।
चुनौतियां और समन्वय
चंबा-भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बार-बार हो रहे भूस्खलन ने सड़क मार्ग को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया है। इस कारण वायुसेना के हेलीकॉप्टरों पर निर्भरता बढ़ गई है। उपायुक्त ने श्रद्धालुओं और उनके परिजनों को आश्वस्त करते हुए कहा कि प्रशासन और वायुसेना पूर्ण समन्वय के साथ इस अभियान को अंजाम दे रहे हैं।
मणिमहेश यात्रा के दौरान फंसे श्रद्धालुओं को निकालने के लिए वायुसेना और स्थानीय प्रशासन की तत्परता सराहनीय है। हेलीकॉप्टरों के माध्यम से चलाए जा रहे इस रेस्क्यू अभियान से हजारों श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला जा चुका है, और शनिवार को यह अभियान अपने अंतिम चरण में है।
