बैजनाथ। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद (एनआईए) के अंतर्गत पपरोला आयुर्वेदिक अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं की भारी कमी हो गई है। पिछले चार सप्ताह से अस्पताल की डिजिटल एक्स-रे मशीन तकनीकी खराबी के कारण बंद पड़ी है, जिससे सैकड़ों मरीजों को निजी केंद्रों पर भारी खर्च का सामना करना पड़ रहा है। खासकर बरसात के मौसम में हड्डी टूटने के मामलों में वृद्धि होने से स्थिति और गंभीर हो गई है।
अस्पताल में प्रतिदिन 50 से 100 मरीज ओपीडी में आते हैं, जिनमें से अधिकांश को एक्स-रे की आवश्यकता पड़ती है। पहले अस्पताल में एक्स-रे की सुविधा मात्र 100 रुपये में उपलब्ध थी, लेकिन अब मरीजों को नजदीकी निजी लैबों या केंद्रों पर 200 से 400 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। यह आर्थिक बोझ विशेष रूप से कमजोर वर्ग के मरीजों के लिए चिंताजनक है। अस्पताल बैजनाथ विधानसभा क्षेत्र के अलावा जोगिंदरनगर, जयसिंहपुर और पालमपुर जैसे आसपास के तीन विधानसभा क्षेत्रों से आने वाले मरीजों का प्रमुख केंद्र है। यहां 200 बिस्तरों वाले इस संस्थान में पहले से ही स्त्री रोग विशेषज्ञ, अस्थि रोग विशेषज्ञ और सर्जन जैसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है।

अस्पताल प्रशासन ने मशीन ठीक कराने के प्रयासों का दावा किया है, लेकिन अब तक कोई सफलता नहीं मिली। एनआईए के चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) डॉ. दलीप गौतम ने बताया, “खराब एक्स-रे मशीन को ठीक करवाने के लिए प्रयास जारी हैं। जल्द ही इसे चालू कर मरीजों को राहत दी जाएगी।” हालांकि, अस्पताल में केवल एक टेक्नीशियन उपलब्ध होने से पहले ही सेवाएं सीमित थीं। यदि वह छुट्टी पर चले जाते, तो एक्स-रे सेवाएं पूरी तरह बंद हो जातीं। अब चार हफ्तों से कोई जांच नहीं हो पा रही।
यह समस्या अस्पताल की अन्य कमियों को भी उजागर कर रही है। यहां ब्लड बैंक, ऑपरेशन थिएटर और अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी सुविधाएं वर्षों से अनुपलब्ध हैं। लाखों रुपये खर्च कर लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट भी आज तक चालू नहीं हो सका है। बरसात के कारण फिसलन से हड्डी टूटने के मामले बढ़ने पर मरीजों को आयुर्वेदिक उपचार के साथ-साथ आधुनिक जांच की आवश्यकता पड़ रही है, लेकिन सुविधाओं के अभाव में उन्हें निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
