“गांधी परिवार ने वीरभद्र की लीगेसी पर जताया भरोसा, प्रो. कमल बोले- सोनिया गांधी का आना खुद एक संदेश है”
शिमला | 14 अक्टूबर 2025
हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस ने एक बार फिर पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की विरासत को याद किया है। तीन साल तक लगातार उपेक्षा के आरोपों के बाद अब पार्टी को एहसास हो गया है कि वीरभद्र सिंह के बिना हिमाचल में चुनावी जमीन मजबूत नहीं हो सकती। पंचायत और नगर निकाय चुनाव से पहले कांग्रेस ने वीरभद्र की विरासत को साधने की रणनीति अपनाई है।
शिमला में हाल ही में आयोजित वीरभद्र सिंह की प्रतिमा के अनावरण कार्यक्रम ने कांग्रेस की बदली रणनीति को स्पष्ट कर दिया। कार्यक्रम में पार्टी की वरिष्ठ नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने वीरभद्र सिंह की जमकर तारीफ करते हुए कहा कि, “वीरभद्र के कण-कण में हिमाचल बसता था। जनता ने कभी महसूस नहीं किया कि वह राजा या मुख्यमंत्री हैं।”
प्रियंका गांधी ने कार्यकर्ताओं से वीरभद्र सिंह और महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलने की अपील की।
इस मौके पर लंबे समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूरी बनाए रहीं सोनिया गांधी भी खुद शिमला पहुंचीं और वीरभद्र सिंह की प्रतिमा का अनावरण किया। इसे गांधी परिवार की ओर से वीरभद्र की विरासत पर भरोसे के रूप में देखा जा रहा है।
वीरभद्र की लहर में हारी थी BJP
हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी के राजनीतिक शास्त्र विभाग के पूर्व प्रमुख प्रो. कमल मनोहर के अनुसार, “वीरभद्र सिंह हिमाचल के उन गिने-चुने मॉस लीडरों में से एक थे, जिन्हें लोग ताउम्र याद रखेंगे।”
साल 2021 में वीरभद्र सिंह के निधन के बाद हुए उपचुनावों में बीजेपी को करारी हार मिली थी। मंडी लोकसभा सीट के साथ-साथ अर्की, जुब्बल-कोटखाई और फतेहपुर विधानसभा सीटों पर भी कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी।
बीजेपी ने खुद स्वीकार किया था कि यह हार वीरभद्र सिंह के नाम की लहर में हुई। कांग्रेस ने इस मौके पर वीरभद्र की पत्नी प्रतिभा सिंह को मंडी से उम्मीदवार बनाकर चुनाव लड़ा और बीजेपी से यह मजबूत सीट छीन ली।
वीरभद्र के नाम पर सरकार, फिर उपेक्षा
साल 2022 के विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस ने प्रतिभा सिंह को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बनाकर ‘वीरभद्र कार्ड’ खेला और सरकार बनाई। लेकिन सरकार बनने के बाद खुद प्रतिभा सिंह और उनके समर्थकों ने कई बार वीरभद्र सिंह की उपेक्षा के आरोप लगाए।
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू पर वीरभद्र सिंह के समर्थकों को दरकिनार करने के आरोप लगे। जब वीरभद्र सिंह की प्रतिमा रिज पर स्थापित नहीं की गई तो उनके बेटे विक्रमादित्य सिंह ने मंत्री पद से इस्तीफा तक दे दिया था। स्थिति यहां तक पहुंच गई थी कि सरकार गिरने की नौबत आ गई। तब हाईकमान ने दो ऑब्जर्वर भेजकर सरकार को संभाला और प्रतिमा जल्द स्थापित करने का आश्वासन दिया।
अनावरण के बाद बदली राजनीतिक तस्वीर
अब जब वीरभद्र सिंह की प्रतिमा रिज पर स्थापित हो गई है, तो कांग्रेस में ‘वीरभद्र फैक्टर’ को फिर से सक्रिय करने की कोशिश शुरू हो गई है। अनावरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने खुद वीरभद्र की तारीफ की, वहीं डिप्टी सीएम मुकेश अग्निहोत्री ने खुद को ‘वीरभद्र स्कूल ऑफ थॉट’ का छात्र बताया।
