शिमला: हिमाचल प्रदेश के मंदिर न केवल आध्यात्मिक केंद्र हैं, बल्कि आर्थिक रूप से भी बेहद समृद्ध हैं। भाषा, कला एवं संस्कृति विभाग के अनुसार, सरकारी नियंत्रण वाले 36 मंदिरों के बैंक खातों में 4,04,39,21,099 रुपये जमा हैं। इसके अलावा, मंदिरों के पास करोड़ों रुपये मूल्य का सोना और चांदी भी है, जो भक्तों द्वारा चढ़ावे के रूप में प्राप्त होता है। मंदिरों ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना और सुख शिक्षा योजना के लिए भी 3.66 करोड़ रुपये का दान दिया है, जिसका विपक्षी दलों ने कड़ा विरोध किया था।
मंदिरों की संपत्ति का ब्योरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, माता चिंतपूर्णी मंदिर के पास 106.94 करोड़ रुपये, श्री नयना देवी मंदिर के पास 98.82 करोड़ रुपये, बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध के पास 46.20 करोड़ रुपये और श्री ज्वाला जी मंदिर के पास 36.71 करोड़ रुपये बैंक डिपॉजिट में हैं। अन्य प्रमुख मंदिरों में रामगोपाल मंदिर डमटाल (16.92 करोड़), दुर्गा मंदिर हाटकोटी (14.69 करोड़), और भीमाकाली मंदिर शिमला (10.12 करोड़) शामिल हैं।
प्रमुख मंदिरों और उनकी संपत्ति
- श्री चिंतपूर्णी, ऊना: 106.94 करोड़ रुपये
- श्री नयना देवी, बिलासपुर: 98.82 करोड़ रुपये
- बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध: 46.20 करोड़ रुपये
- श्री ज्वालाजी, कांगड़ा: 36.71 करोड़ रुपये
- रामगोपाल मंदिर, डमटाल: 16.92 करोड़ रुपये
- दुर्गा मंदिर हाटकोटी, शिमला: 14.69 करोड़ रुपये
- भीमाकाली मंदिर, शिमला: 10.12 करोड़ रुपये
- हनुमान मंदिर जाखू, शिमला: 7.41 करोड़ रुपये
सुख आश्रय और सुख शिक्षा योजना में योगदान
पिछले तीन वर्षों में मंदिरों ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय और सुख शिक्षा योजना के लिए 3.66 करोड़ रुपये का योगदान दिया। सबसे अधिक योगदान बाबा बालक नाथ दियोटसिद्ध ने 200 लाख रुपये, श्री नयना देवी ने 100 लाख रुपये और बाबा बालक नाथ शाहतलाई ने 50 लाख रुपये का दिया। अन्य मंदिरों जैसे हणोगी माता मंदिर (5 लाख), नवाही देवी मंदिर (2 लाख), महामाया बाला सुंदरी (4 लाख), और शूलिनी माता मंदिर (5 लाख) ने भी योगदान दिया।
विपक्ष का विरोध
मंदिरों द्वारा सरकारी योजनाओं के लिए दान देने पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कड़ा विरोध जताया। भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार मंदिरों की संपत्ति का उपयोग अपनी योजनाओं के लिए कर रही है। जनवरी 2025 में भाषा एवं संस्कृति विभाग ने आयुक्त मंदिर और उपायुक्तों को मंदिर न्यास के माध्यम से बेसहारा और जरूरतमंद बच्चों की सहायता के लिए अनुरोध किया था, जिसके बाद यह विवाद और गहरा गया।
मंदिरों का सामाजिक योगदान
मंदिर न्यास न केवल धार्मिक गतिविधियों में सक्रिय हैं, बल्कि सामाजिक कार्यों जैसे विकास कार्य, बच्चों की शिक्षा और जरूरतमंदों की मदद में भी योगदान दे रहे हैं। इसके लिए तय प्रक्रिया का पालन किया जाता है। मंदिरों की यह आर्थिक शक्ति उन्हें न केवल धार्मिक, बल्कि सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण बनाती है।
हिमाचल प्रदेश के मंदिरों की यह समृद्धि और सामाजिक योगदान उनकी सांस्कृतिक और आर्थिक ताकत को दर्शाता है, लेकिन सरकारी योजनाओं में उनके योगदान को लेकर उठा विवाद इस मुद्दे को और जटिल बनाता है।
