कुल्लू, 11 नवंबर। हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की तीर्थन घाटी स्थित झनियार गांव में सोमवार दोपहर अचानक भड़की आग ने पूरे गांव को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते 16 मकान, चार गौशालाएं और दो देवता मंदिर जलकर राख हो गए। अग्निकांड में अनुमानित 4 करोड़ 20 लाख रुपये की संपत्ति स्वाह हो गई। गांव का सड़क से एक किलोमीटर दूर होना और दमकल वाहनों की समय पर न पहुंच पाना इस त्रासदी की मुख्य वजह रहा।
घटना सोमवार दोपहर की है जब गांव में अचानक चिंगारी उठी और काष्ठकुणी शैली में बने लकड़ी के मकानों में तेजी से फैल गई। ग्रामीणों की आंखों के सामने उनके आशियाने जलते रहे, लेकिन असहाय लोग कुछ कर नहीं पाए। आग की लपटों ने देवता वीमू नाग पतयाल और जोगनी माता के मंदिर को भी नहीं बख्शा। देवता का भंडार गृह पूरी तरह जल गया। चार गौशालाएं भी इस हादसे की भेंट चढ़ गईं।
सर्दियों में बढ़ता खतरा
हिमाचल के पहाड़ी क्षेत्रों में सर्दी के मौसम में अग्निकांड के मामले आम हैं। सर्द हवाओं से बचने के लिए ग्रामीण घरों में बाल्न लकड़ी और पशुओं के लिए सूखी घास भारी मात्रा में स्टोर करते हैं। जरा सी चिंगारी इन ज्वलनशील सामग्रियों को भड़का देती है, जिससे आग प्रचंड रूप ले लेती है। विशेषज्ञों के अनुसार, काष्ठकुणी शैली के तीन-चार मंजिला मकान पूरी तरह लकड़ी से बने होते हैं। निचली मंजिल पर पशु बांधे जाते हैं और ऊपरी मंजिलों पर परिवार रहता है। एक बार आग लगने पर यह पूरे ढांचे को चंद मिनटों में राख कर देती है।
घरों की निकटता और सड़क की कमी बनी आफत
पहाड़ी इलाकों में समतल भूमि की कमी के कारण घर एक-दूसरे से सटकर बने होते हैं। एक मकान में आग लगते ही पड़ोसी घर भी चपेट में आ जाते हैं। झनियार गांव में यही हुआ। सबसे बड़ी समस्या सड़क सुविधा की कमी रही। गांव मुख्य सड़क से करीब एक किलोमीटर दूर है, जिस कारण दमकल वाहन मौके पर नहीं पहुंच सके। ग्रामीणों को बाल्टियों और स्थानीय साधनों से आग बुझाने की कोशिश करनी पड़ी, लेकिन यह नाकाफी साबित हुई।
स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। प्रारंभिक रिपोर्ट में लापरवाही को आग का कारण बताया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जिला प्रशासन ने मुआवजे की घोषणा की है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और अग्निशमन सुविधाओं की कमी जैसी मूल समस्याओं का समाधान जरूरी है।
